प्रो. मिश्र ने बताया कि सोशल मीडिया पर मोबाइल ऑक्सीजन प्वाइंट बनाने का विचार साझा किया तो अमेरिका समेत देश व काशी के कई गणमान्य लोगों ने भी मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। पहला मोबाइल ऑक्सीजन प्वाइंट का प्रयोग अगर सफल रहा तो इसकी तर्ज पर देश भर में ऑक्सीजन प्वाइंट तैयार किए जा सकेंगे। दो से तीन दिन के अंदर पहला ऑक्सीजन प्वाइंट शुरू हो जाएगा। इसके बाद आगे इसकी संख्या को बढ़ाने पर विचार किया जाएगा।
प्रो. मिश्र ने कहा कि मरीजों को अस्पताल में बेड नहीं मिल रहा है और हालत गंभीर होने पर ऑक्सीजन की भी किल्लत हो जा रही है। ऐसी स्थिति में यह मोबाइल ऑक्सीजन प्वाइंट वहीं पर खड़ा रहेगा और जरूरतमंदों को ऑक्सीजन की सेवा देगा। इसके साथ ही वाहन पर कैमरे के जरिए ऑनलाइन मेडिकल सलाह भी मिलेगी। इसमें न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. रामेश्वरनाथ चौरसिया, डॉ. अभिषेक पाठक, डॉ. वरुण कुमार सिंह, डॉ. आनंद कुमार सहयोग कर रहे हैं। प्रो. रामेश्वरनाथ चौरसिया ने कहा कि रोगियों को राहत देने के लिए यह एक प्रयोग है, हमारा प्रयास है कि हम ऑक्सीजन की कमी से किसी को भी तड़पकर नहीं मरने देंगे। डॉ. अभिषेक पाठक ने कहा कि मरीजों के लिए जो भी बेहतर होगा, हम जरूर करेंगे, अभी यह छोटा सा प्रयास है।