वाराणसी। मोबाइल मौजूदा समय में अपनों के साथ ही देश और दुनिया से जुड़े रहने का प्रमुख माध्यम है। हालांकि, यही मोबाइल पति-पत्नी के बीच दूरी का भी एक बड़ा कारण बन रहा है। यह हम नहीं, बल्कि जिले के पुलिस महकमे के महिला सहायता प्रकोष्ठ में रोजाना आने वाली शिकायतों को देखकर लग रहा है। प्रकोष्ठ में तैनात महिला पुलिसकर्मियों और काउंसलर के अनुसार, 25 से 40 वर्ष की आयु वर्ग के पति-पत्नी मोबाइल पर घंटों बातचीत और चैटिंग को लेकर एक-दूसरे पर शक करने के साथ ही तलाक लेने तक का निर्णय ले लेते हैं।
गौरतलब है कि महिला सहायता प्रकोष्ठ में रोजाना औसतन 25 से ज्यादा शिकायतें आती हैं, इनमें से चार से पांच शिकायत मोबाइल पर घंटों की बातचीत या चैटिंग को लेकर विवाद से जुड़ी होती हैं। जो प्रकरण काउंसिलिंग के बाद भी आपसी सहमति से नहीं सुलझ पाते हैं, उनमें मुकदमे दर्ज करा कर कानूनी कार्रवाई की जाती है।
केस 1
मोबाइल से घंटों बात को लेकर दंपति में होती थी मारपीट
लंका क्षेत्र की एक युवती का विवाह भेलूपुर क्षेत्र के एक युवक से इसी साल हुआ है। सात माह की गर्भवती युवती ने अक्तूबर के आखिरी में एसएसपी आफिस में पति की शिकायत की। मामला महिला सहायता प्रकोष्ठ पहुंचा तो पत्नी ने रोजाना मारपीट की शिकायत की। वहीं पति ने पत्नी पर घंटों मोबाइल से बातचीत का आरोप लगाया। काउंसिलिंग के बाद अब दोनों सामान्य तरीके से रह रहे हैं।
केस 2
मोबाइल से घंटों करती थी बात, पति ने छोड़ दिया मायके
कैंट थाना अंतर्गत सरसौली की युवती का विवाह मऊ के युवक से हुई है। युवती के मोबाइल पर घंटों बातचीत की वजह से पति उसे मायके छोड़ गया और विदाई से इनकार कर दिया। शिकायत के बाद मामला महिला सहायता प्रकोष्ठ पहुंचा तो दोनों की काउंसिलिंग की गई। अब युवती पति और ससुराल के अन्य लोगों को पर्याप्त समय देते हुए मोबाइल पर कम बात करती है।
केस 3
बच्चे को अपने पास रखा , बीवी को किया मना
रामनगर में पत्नी को मोबाइल में दिन भर व्यस्त देख पति उससे कन्नी काटने लगा। एक दिन पत्नी मायके गई तो पति ने बच्चा अपने पास रख लिया। इसके साथ ही पत्नी को वापस ससुराल आने से मना कर दिया। मामला महिला शिकायत प्रकोष्ठ पहुंचा तो तीन बार की काउंसिलिंग के बाद पति बच्चे के साथ ही पत्नी को भी घर में रखने के लिए तैयार हो गया।
समझौते के 10 दिन बाद बुलाया जाता है फीडबैक के लिए
महिला सहायता प्रकोष्ठ की प्रभारी सब इंस्पेक्टर नीलम सिंह ने बताया कि दरोगा प्रियंका सिंह सहित पांच पुलिसकर्मी यहां तैनात हैं। इसके अलावा अलग-अलग एनजीओ से जुड़े लोग काउंसिलिंग के लिए रोजाना मौजूद रहते हैं। बगैर अभिभावक और अधिवक्ता के पति-पत्नी को आमने-सामने बैठा कर उनको बातचीत करने का पर्याप्त समय दिया जाता है। इसके बाद उनकी काउंसिलिंग की जाती है। एक बार में मसला नहीं सुलझता है तो फिर तिथि देकर बुलाया जाता है। प्रकरण का निस्तारण होने के बाद 10 दिन बाद फीडबैक के लिए फिर बुलाया जाता है।
अब तक आई 1100 से ज्यादा शिकायतें
महिला सहायता प्रकोष्ठ में इस वर्ष एक जनवरी से अब तक 1100 से ज्यादा शिकायतें आईं हैं। इनमें 835 से ज्यादा को निस्तारित किया जा चुका है। सब इंस्पेक्टर नीलम सिंह ने बताया कि मोबाइल पर घंटों की बातचीत के अलावा आर्थिक तंगी, ससुराल पक्ष की मांग मायके पक्ष द्वारा पूरी न करने पर प्रताड़ना, एक-दूसरे पर अनावश्यक शक, वर्षों तक बच्चे का न पैदा होना जैसी शिकायतें मुख्य रूप से रहती हैं। प्रयास यही है कि सहमति से विवाद सुलझ जाए। विवाद न सुलझने पर ही सख्ती या कानूनी कार्रवाई का सहारा लिया जाता है।
महिला सहायता प्रकोष्ठ की स्थापना का उद्देश्य यही है कि पति-पत्नी बगैर किसी तीसरे पक्ष के आमने-सामने बैठ कर अपनी बात रखें। जो भी संदेह या बात हो, उसे स्पष्ट कर लें। इसके बाद दोनों की काउंसिलिंग कराई जाती है। जहां यह लगता है कि काउंसिलिंग से भी बात नहीं बनेगी तभी कानूनी कार्रवाई की जाती है। - अमित पाठक, एसएसपी