मतगणना स्थल पर निर्धारित प्रक्रिया का पालन
मतगणना मंगलवार सुबह आठ बजे शुरू होगी। स्ट्राॅन्ग रूम खोलने, बैलेट बॉक्स को बाहर निकालने और बैलेट पेपर की गिनती की प्रक्रिया निर्वाचन अधिकारियों की निगरानी में होगी। मतगणना स्थल पर प्रवेश की अनुमति और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं का पालन कराया जाएगा। प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों सीटों के परिणाम घोषित किए जाएंगे।
सपा के आशुतोष सिन्हा और भाजपा के केदारनाथ सिंह के बीच मुकाबले पर नजर
वाराणसी खंड स्नातक एमएलसी सीट पर सपा के निवर्तमान एमएलसी आशुतोष सिन्हा और भाजपा के पूर्व एमएलसी केदारनाथ सिंह के बीच मुकाबले पर खास नजर रहेगी। दोनों प्रत्याशी पिछले चुनाव में भी आमने-सामने थे। इस बार स्नातक सीट पर कुल 24 प्रत्याशी मैदान में हैं।
केदारनाथ सिंह को भाजपा ने एक बार फिर प्रत्याशी बनाया था। इससे पहले भी इस सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। वहीं, आशुतोष सिन्हा निवर्तमान एमएलसी हैं। दूसरी बार चुनाव मैदान में हैं। पिछले चुनाव 2020 में आशुतोष सिन्हा को 26,335 मत मिले थे, जबकि केदारनाथ सिंह को 22,685 मत मिले थे। दोनों के बीच 3,650 मतों का अंतर रहा था।
2020 में 936 मतों से जीते थे लाल बिहारी यादव, इस बार मुकाबला कड़ा
वाराणसी खंड शिक्षक एमएलसी सीट पर सपा के निवर्तमान एमएलसी लाल बिहारी यादव, भाजपा के डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा और निर्दलीय प्रत्याशी चेतनारायण सिंह समेत 10 उम्मीदवार मैदान में हैं। वर्ष 2020 के चुनाव में लाल बिहारी यादव ने डॉ. प्रमोद मिश्रा को 936 मतों से हराया था। पूर्व एमएलसी चेतनारायण सिंह भी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़े थे।
2020 के चुनाव के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, लाल बिहारी यादव को 7,766 मत मिले थे, जबकि डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा को 6,830 मत मिले थे। दोनों के बीच 936 मतों का अंतर था। इस बार के परिणाम से दोनों प्रत्याशियों के प्रदर्शन की तुलना की जा सकेगी। 23 अक्तूबर को हुए मतदान में शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 69.87 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। आठ जिलों में 34,900 मतदाताओं में से 24,384 ने वोट डाले हैं।
प्रथम वरीयता के मतों से तय होते हैं परिणाम
मतगणना में मतपत्रों की गिनती निर्धारित वरीयता आधारित प्रक्रिया के अनुसार होगी। मतदान के दौरान मतदाताओं को अपनी पहली पसंद के प्रत्याशी के सामने अंक एक लिखना था। इसके बाद वे अपनी पसंद के अनुसार दूसरे और अन्य प्रत्याशियों को भी क्रमवार वरीयता दे सकते थे। मतपत्रों की वैधता की जांच और मतों की गणना निर्वाचन नियमों के अनुसार की जाती है। वरीयता आधारित चुनाव में मतगणना की पूरी प्रक्रिया सामान्य विधानसभा चुनाव की मतगणना से अलग हो सकती है। परिणाम निर्धारित कोटा, वैध मतों और लागू नियमों के आधार पर तय होता है।