वाराणसी में प्रतिकार रैली के दौरान हुई हिंसा और तोड़फोड़ की घटना में नामजद कांग्रेस विधायक अजय राय की जमानत हाईकोर्ट ने मंजूर कर ली है। उनको वाराणसी में मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत होकर जमानत राशि जमा करनी होगी। अजय राय को इस मामले में पहले भी रासुका से मुक्ति मिल चुकी है। उनके खिलाफ गैंगस्टर का मामला भी दर्ज किया गया था। इससे पूर्व अजय राय की जमानत एक बार हाईकोर्ट से नामंजूर हो चुकी है। उन्होंने दूसरी बार अर्जी प्रस्तुत कर जमानत की मांग की थी। अर्जी पर न्यायमूर्ति आरडी खरे ने सुनवाई की।
बचाव पक्ष की ओर से कहा कि याची मौजूदा समय में विधायक है। राजनीतिक द्वेष के कारण उसे गंभीर मुकदमों में फंसा दिया गया। प्रतिकार रैली में हुई हिंसा में उसकी कोई भूमिका नहीं थी। तोड़फोड़ की घटना में वह शामिल नहीं था। हाईकोर्ट ने जमानत मंजूर करते हुए कहा है कि यदि वह किसी अन्य मुकदमे में वांछित न हों तो जमानत पर रिहा कर दिया जाए।
बीते साल अक्तूबर महीने में अन्याय प्रतिकार यात्रा के दौरान हुए हिंसा, बवाल की घटना में नामजद और फतेहगढ़ जेल में बंद विधायक अजय राय को मंगलवार को हाईकोर्ट से जमानत मिलने की जानकारी मिलते ही यहां कांग्रेसियों में खुशी छा गई। विधायक के परिवार के लोगों और कांग्रेसियों ने उच्च न्यायालय के प्रति आभार जताते हुए जमानत मिलने को असत्य पर सत्य की जीत बताया।
विधायक की पत्नी रीना राय ने कहा कि बिना किसी अपराध के मेरे पति को जेल भेजा गया। मेरे पति और परिवार ने राजनीतिक विरोध की जो कीमत चुकाई है, उसका न्याय अदालत ने किया है। यह असत्य पर सत्य की जीत है। मड़िहान विधायक ललितेशपति त्रिपाठी ने कहा कि कोर्ट के निर्णय ने एक बार फिर साबित किया है कि अजय राय के विरुद्ध अन्यायपूर्ण प्रशासनिक कार्रवाई के विरुद्ध हमारा सत्याग्रह जायज था। प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता एवं राजीव गांधी स्टडी सर्कल के राष्ट्रीय सह समन्वयक प्रो. सतीश राय, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री सतीश चौबे, सूचनाधिकार विभाग के अध्यक्ष बैजनाथ सिंह और पूर्व उपाध्यक्ष छावनी परिषद शैलेंद्र सिंह, राघवेंद्र चौबे ने कहा कि विधायक अजय राय को जमानत मिलने से काशी की जनता खुश है।