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कागज तक सिमटी गंगा स्वच्छता पखवाड़ा प्रदर्शनी, दूसरे दिन रहा फ्लाप

Sat, 18 Mar 2017 01:07 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
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नहीं दिखी रुचि, गिनती के लोग पहुंचे थे गंगा घाट - फोटो : अमर उजाला
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गंगा की सफाई के प्रति महकमे तनिक भी संजीदा नहीं हैं। दशाश्वमेध घाट पर गंगा स्वच्छता पखवाड़ा के तहत प्रदर्शनी के नाम पर महज कोरमपूर्ति की गई। कार्यक्रम में गिनती के लोग पहुंचे थे। शुक्रवार को स्वच्छता पखवाड़ा का दूसरा दिन था।
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एक पखवाड़े के अभियान के तहत नगर निगम और पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की संस्था पर्यावरण शिक्षण केंद्र (सीईई) की ओर से विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए लोगों को गंगा की सफाई के लिए प्रेरित किया जाना है।

नेशनल मिशन फार क्लीन गंगा के नमामि गंगे अभियान के तहत 31 मार्च तक चलने वाले गंगा स्वच्छता पखवाड़े की औपचारिक शुरुआत गुरुवार को नगर निगम में की गई थी। मेयर राम गोपाल मोहाले और नगर आयुक्त श्रीहरि प्रताप शाही ने इसके तहत होने वाले कार्यक्रमों पर चर्चा की थी।
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दूसरे दिन शुक्रवार को दशाश्वमेध घाट पर गंगा स्वच्छता के लिए प्रदर्शनी लगाई गई। संयुक्त नगर आयुक्त रमेश चंद्र सिंह और सफाई दूत डॉ. रितू गर्ग ने इसका उद्घाटन किया लेकिन यहां गिनती के लोग पहुंचे थे। प्रदर्शनी में स्लोगन लिखे पोस्टर लगाए गए थे।

गंगा सफाई के प्रति जागरूकता के लिए हस्ताक्षर भी किया जाना था। महज कुछ लोगों ने ही हस्ताक्षर किए थे। दोपहर में पूरी कुर्सियां खाली थीं। शाम को गंगा आरती से पहले कुछ लोग प्रदर्शनी में जरूर दिखे। 

उद्घाटन अवसर पर एनएमसीजी के नजीब हसन, मोहित शर्मा, दिव्या और उत्तर प्रदेश राज्य गंगा नदी संरक्षण अभिकरण के पीके सरकार मौजूद रहे। सीईई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर नीरज कुमार पाल का कहना है कि शाम को काफी संख्या में लोगों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

दोपहर में धूप के चलते संख्या कम थी। लोग धीरे-धीरे अभियान से जुड़ रहे हैं।
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गंगा सफाई अभियान पर भारी सीवेज

गंगा सफाई अभियान पर भारी सीवेज - फोटो : अमर उजाला
नेशनल मिशन फार क्लीन गंगा के नमामि गंगे की ओर से गंगा निर्मलीकरण को गति देने के लिए तमाम जतन हो रहे हैं मगर अभियान कागजों तक सिमटा है। शहर से निकलने वाला 300 एमएलडी सीवेज में से 200 एमएलडी वरुणा, अस्सी और बड़े नालों के जरिए सीधे गंगा में गिर रहा है।

जब तक सीवेज शोधन की मुकम्मल व्यवस्था नहीं होगी, जन जागरूकता और जन सहभागिता मुहिम परवान नहीं चढ़ेगी। गोइठहां में 120 एमएलडी का नया और दीनापुर में पहले से बने 90 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को विस्तार देकर 140 एमएलडी क्षमता का बनाया जा रहा है। दीनापुर के अलावा 10 एमएलडी का एसटीपी भगवानपुर में और खुद का डीरेका में 12 एमएलडी का प्लांट है।

गोइठहां और दीनापुर प्लांट को पूरा करने की मियाद मार्च, 2017 तक रखी गई थी लेकिन जल निगम और गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अधिकारियों की कछुआ चाल से अब तक काम आधा भी नहीं हुआ है। इसके निर्माण में कम से कम एक साल का समय और लगेगा। तब तक सीवेज गंगा में ही गिरेगा।


सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 200 एमएलडी सीवेज गंगा में गिरता है। शहरी क्षेत्र की तकरीबन 18 लाख की आबादी के लिए जलकल विभाग 140-145 एमएलडी रोजाना पेयजल की आपूर्ति करता है। इसके अलावा घरों में लगे निजी पंप एवं सरकारी हैंडपंपों का पानी भी अलग से डिस्चार्ज होता है।

इसे शामिल कर लें तो सीवेज 200 एमएलडी के पार गंगा में गिरता है। जब तक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और सीवेज पंपिंग स्टेशन के जरिए शोधन की व्यवस्था नहीं होगी, गंगा को निर्मल बनाने का अभियान परवान नहीं चढ़ सकेगा।
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