फैशन की चमक दमक से भरपूर दुनिया। रैंप पर कैटवॉक और ताज जीतने तक का सफर एक सपने सरीखा था। मिस और मिसेज बनारस के लिए प्रतियोगिता कड़ी थी। जीत के लिए पूरा परिवार उत्साह बढ़ा रहा था।
एक ओर जहां सास ससुर, जेठ जेठानियों से भरे पूरे परिवार ने अपनी बहुओं को खुला आसमान दिया उड़ने को तो उन्होंने भी खुद को साबित किया। अब तो फैशन की दुनिया पर छा जाने को तैयार हैं। हम बात कर रहे हैं सोमवार को मिस एंड मिसेज बनारस का खिताब जीतने वाली शिवांगी श्रीवास्तव, दीपमाला केशरी और ओएशी डॉन की...।
परिवार में फैशन आइकन और सेल्फी क्वीन हूं : दीपमाला
दीपमाला केशरी परिवार के साथ
- फोटो : अमर उजाला
मिसेज बनारस (36-45) का खिताब जितने वाली दीपमाला केशरी अपने परिवार में फैशन आइकन मानी जाती हैं। प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए जेठ और जेठानी ने प्रोत्साहित किया। पति सुरेश केशरी भी हर कदम पर पत्नी का उत्साह बढ़ाते रहे।
चार महीने की मेहनत का ये फल ही था जिसकी बदौलत उन्होंने 18 प्रतिभागियों के बीच ये खिताब जीता। लक्सा निवासी दीपमाला कहती हैं कि अपने बहनों, जेठानियों के बीच मैं फैशन आइकन हूं। मेरे ड्रेसिंग सेंस, मेरी फिटनेस के लोग कायल हैं। मुझे लोग सेल्फी क्वीन भी कहते हैं।
फैशन शो शौक तो था लेकिन मिर्जापुर की रहने वाली हूं। इसलिए शादी से पहले मौका नहीं मिला। बनारस आई तो बच्चों की परवरिश में ही रह गई। 18 साल की बेटी जाह्नवी और 13 साल बेटा शुभ है। अब मिसेज यूपी में भी भाग लेने की तैयारी है।
अब आगे बढ़ने की ललक जगी : ओएशी
पति और बच्चे के साथ ओएशी डॉन
- फोटो : अमर उजाला
20-35 आयु वर्ग की कैटेगरी में मिसेज बनारस और बेस्ट वॉक का खिताब जीतने वाली ओएशी डॉन कहती हैं कि कुछ हासिल करना है तो मेहनत करनी ही पड़ती है। ऑडिशन से लेकर ग्रैंड फिनाले के चार महीने बहुत कुछ सीखने और अनुभव करने का मौका मिला।
मैंने तो खुद हाउस वाइफ से आगे कुछ सोचा ही नहीं था। मिसेज बनारस में बाई चांस प्रतिभाग करने का मौका मिल गया। पति सौरेश डॉन ने ही नहीं मम्मी पापा (सास ससुर) शिखा डॉन व बिप्लब डॉन ने भी उत्साह बढ़ाया। बेटे अनघ को संभालने का काम मम्मी-पापा ने किया।
रैंप वॉक तो कभी स्कूल में भी नहीं किया था। अचानक से इस कांटेस्ट के लिए किया तो पहले थोड़ी झिझक हुई, लेकिन बाद में पूरे आत्मविश्वास के साथ रैंप पर उतरी। मिसेज बनारस का खिताब जीतने के साथ ही मैंने खुद पर भरोसा करना सीखा। खुद के अंदर के सकारात्मकता आई है। हाउस वाइफ से आगे बढ़ने की ललक जगी है।
ये भी समझ आया कि फिल्म और टेलीविजन की दुनिया में जितनी चमक है, उसके लिए उतनी ही ज्यादा मेहनत की जरूरत है। बहुत कुछ करना पड़ता है। मेरी कोशिश होगी कि मैं मिसेज यूपी के लिए ट्राई करूं।
पापा पहले नाराज हुए, अब वही सबसे ज्यादा खुश : शिवांगी
शिवांगी श्रीवास्तव के मम्मी पापा
- फोटो : अमर उजाला
मेरा दूर दूर तक कोई इरादा नहीं था मॉडलिंग या फिर फैशन की दुनिया में आने को लेकिन मिस बनारस का खिताब जीतने के बाद अब कॅरियर का रुख इसी ओर करने की सोच रही हूं। ये कहना है कि मिस बनारस का खिताब जीतने वाली शिवांगी श्रीवास्तव का।
शिवांगी तो बैंकिंग या सीए में कॅरियर बनाने की सोच रही थी लेकिन इस खिताब ने वह आत्मविश्वास पैदा किया कि अब मिस इंडिया की प्रतियोगिता हिस्सा लेने की सोच रही हूं। मैंने इस कांटेस्ट में अपना नाम दिया था तो पापा थोड़ा नाराज जरूर हुए थे।
उनका मानना था कि मैं पढ़ाई पर ध्यान दूं लेकिन मम्मी ने कहा कि अगर मौका मिला है तो मुझे ट्राई करना चाहिए। फिर तो पापा भी राजी हो गए और आज तक ट्राफी और क्राउन शिवांगी ने जीता तो उनके पापा मम्मी (राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव व प्रतिभा श्रीवास्तव) सबसे ज्यादा खुश हैं। शिवांगी शर्मीली स्वभाव की थीं लेकिन कांटेस्ट की ग्रूमिंग क्लास ने उन्हें अब बदल दिया है। आत्म विश्वास आ गया है। इस कांटेस्ट में उन्हें बेस्ट वॉक का भी खिताब मिला।