सामूहिक दुष्कर्म के मामले में गिरफ्तार आरोपियों के परिजनों ने बृहस्पतिवार को पुलिस आयुक्त कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। हाथों में नारे लिखीं तख्तियां लेकर महिलाओं ने विरोध दर्ज कराया। तख्तियों पर लिखा था कि महिला अपराध बना ब्लैकमेल का अड्डा, पुलिस निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करे। पुलिस आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर परिजनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की।
समाजसेवियों के साथ पहुंचे परिजनों ने पीड़िता पर धमकी देकर धन उगाही का आरोप लगाया। आरोप है कि युवती की ओर से पैसे की मांग की जा रही है। जिन्होंने पैसे दिए, कोर्ट में पीड़िता ने उनका नाम नहीं लिया। एफआईआर में आरोप बेबुनियाद है। धमकी दी जा रही है कि पैसे नहीं देंगे तो अज्ञात आरोपियों के नाम लिए जाएंगे। यह सरासर अन्याय है। मीडिया और सोशल मीडिया के दबाव में आकर पुलिस सही तथ्यों की जांच नहीं कर रही है।
मुख्यालय पर प्रदर्शन करते लोग।
- फोटो : अमर उजाला
जिसे आरोपी बनाया, उसी से कर रही थी चैटिंग
पुलिस आयुक्त ने बताया कि एक आरोपी के परिजन ने उन्हें अपने बेटे के इंस्टाग्राम चैट की स्क्रीन शॉट दिखाई। कहा कि बेटे को सामूहिक दुष्कर्म के मुकदमे में आरोपी बनाने वाली पीड़िता खुद उसे मैसेज कर रही थी और कैफे पहुंचने की जानकारी दे रही थी।
स्क्रीन शॉट 2 या 3 अप्रैल का था। परिजन ने कहा कि यदि कैफे में दुष्कर्म हुआ था तो युवती ने शोर क्यों नहीं मचाया? किसी से मदद क्यों नहीं मांगी? कैफे से निकलते ही पुलिस के पास क्यों नहीं गई? 112 नंबर पर फोन क्यों नहीं किया।
पीड़िता में हेपेटाइटिस बी पाया जाना बहुत बड़ा सवाल
सामूहिक दुष्कर्म की घटना संदेह के घेरे में है। पीड़िता में हेपेटाइटिस बी पाया जाना बहुत बड़ा सवाल है। क्या पीड़िता को पहले से नशीले पदार्थ दिए जा रहे थे, क्या उसकी जानकारी पीड़िता को थी। कही ऐसा तो नहीं ये अनमोल और उसके सभी साथी मिलकर पूरा रैकेट चलाते थे, आपसी मतभेद की वजह से इतनी बड़ी घटना को अंजाम दिया गया।
खबरों के माध्यम से सुना कि इसमें पीड़िता के कुछ साथी भी शामिल हैं, इसकी भी जांच हो। पीड़िता की बताई गई सभी जगहों की सीसी कैमरे की फुटेज और आरोपियों के मोबाइल लोकेशन की जांच की जाए। एक लड़की नशे की हालत में कई दिनों तक रोड़ पर भटकती रही लोग फायदा उठाते रहे और किसी को भनक तक नहीं। घटना की पूरी सत्यता और निष्पक्ष रूप से जांच हो ताकि दोषी को सजा और पीड़िता को न्याय मिल सके। - सीमा चौधरी, अध्यक्ष, युवा फाउंडेशन
पीएम के संज्ञान लेने पर सक्रिय हुआ कमिश्नरेट
लालपुर-पांडेयपुर थाने क्षेत्र की 19 वर्षीय युवती से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने प्रधानमंत्री के संज्ञान में लेने पर एसआईटी (विशेष जांच दल) गठित की है। एक दिवसीय दौरे पर 11 अप्रैल को काशी पहुंचे प्रधानमंत्री ने विमान से उतरते ही सबसे पहले पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल, मंडलायुक्त कौशल राज शर्मा और जिलाधिकारी एस. राजलिंगम से दुष्कर्म मामले में बातचीत की थी।
घटना की सिलसिलेवार जानकारी ली और कहा था कि आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई हो। इसके बाद ही कमिश्नरेट पुलिस काफी सक्रिय हुई। इस मामले में डीसीपी वरुणा जोन के आईपीएस चंद्रकांत मीना को हटाकर डीजीपी ऑफिस से अटैच कर दिया गया।
जांच पूरी होने तक अज्ञात नहीं होंगे गिरफ्तार
पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि एसआईटी की रिपोर्ट आने तक अज्ञात आरोपियों को चिह्नित कर पकड़ने की कार्रवाई नहीं की जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई होगी। उन्होंने बताया कि सामूहिक दुष्कर्म के अपराध से संबंधित मुकदमे में 60 दिन में पुलिस अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर देगी।