पीड़िता ने कहा कि भय और मजबूरी के कारण वह लंबे समय तक आरोपी के कब्जे में रही। 2013 में एक बच्ची का जन्म भी हुआ।आरोपी के अत्याचार और धमकियों से परेशान होकर वह 12 अप्रैल 2016 को किसी तरह उसके चंगुल से छूटकर वाराणसी पहुंची। इसके बाद भी आरोपी मोबाइल फोन से लगातार धमकियां देता रहा। पीड़िता के अनुसार, 18 अप्रैल 2016 की सुबह आरोपी महेश्वर अपने भांजे कुंजेश पांडेय के साथ उसके घर पहुंचा।
दोनों पीछे के रास्ते से घर में दाखिल हुए और बाहर आने के लिए आवाज लगाने लगे। उसका भाई बाहर निकला तो दोनों आरोपियों ने गैलन में भरा पेट्रोल उसके ऊपर और घर में फेंक दिया। इसके बाद आग लगा दी। आग की चपेट में आने से घर का सामान, पर्दे और अन्य वस्तुएं जल गईं और झुलसे भाई को पहड़िया के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी मौत हो गई। आरोपियों ने धमकी दी थी कि अगर वह मुंबई नहीं गई तो उसे भी जलाकर राख कर देगा।