धरोहर बन चुके इमारत ओर उसकी घड़ी के के प्रति प्रशासनिक उदासीनता से लोग खिन्न हैं। पूर्वजों ने दान करके अंग्रेजों के शासन काल में इसे बनवाया पर नई पीढ़ी आजाद होने के बाद भी अपनी धरोहरों के प्रति उदासीन बनी है।
मिर्जापुर नगर पालिका के उपाध्यक्ष मनोज जायसवाल ने बताया कि इस घड़ी को कई बार बनवाया गया। कई बार यह ठीक भी हुई लेकिन अब इसके कारीगर नहीं मिल रहे हैं। इससे यह बंद है। प्रयास किया जा रहा है कि इसके कारीगर की व्यवस्था की जाए ताकि यह घड़ी अपनी पूर्व अवस्था को फिर से प्राप्त हो।