शिवपुर के रामजानकी धाम कॉलोनी के रहने वाले शशिभूषण रघुवंशी दोपहर करीब डेढ़ बजे अपनी कार से वाराणसी से पड़ाव की तरफ जा रहे थे। राजघाट पुल पर जय गुरुदेव के अनुयायियों की भीड़ में उनकी गाड़ी फंस गई। उन्होंने नीचे उतर कर खुद के प्रयास के अलावा पुलिस वालों को अनुयायियों को और अन्य राहगीरों को पुल पर जाने से रोकने को कहा। न तो पुलिस ने सुना और न ही अनुयायी रुके। उनकी आंखों के सामने ही भगदड़ हो गई और चंद मिनटों में दो दर्जन लोग लाशों में तब्दील हो गए। वह और उनके आसपास के लोग जान बचाकर पड़ाव की ओर भागे। वह 11 बजे से दोपहर डेढ़ बजे तक पुल पर ही फंसे रहे।
आध्यात्मिक सत्संग में शामिल लोगों के साथ ही अन्य राहगीर भी राजघाट पुल से गुजर रहे थे। भीड़ बढ़ने पर अचानक से पुल पर जाम लग गया। पुल पर पैदल चलने वाले लोगों और वाहनों की इतनी भीड़ हो गई कि किसी का निकलना मुश्किल हो गया था। रूट डायवर्जन की कोई व्यवस्था नहीं थी। जांच में जुटे प्रशासनिक अधिकारियों की मानें तो पुल पर ज्यादा भीड़ होने के बाद कुछ लोगों का दम घुटने लगा। इसी बीच किसी ने पुल हिलने की अफवाह फै ला दी। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। इतने में 24 लोग काल के मुंह मे समा गए। हादसे के वक्त घबराहट इतनी थी कि कई लोग अपने वाहन छोड़ कर भाग गए थे। भीड़ खत्म होने के बाद वह वापस आकर अपनी गाड़ी ले गए।
जनजागरण शोभायात्रा के दौरान हुए हादसे ने कई लोगों की दुनिया ही वीरान कर दी। इस हादसे में किसी के जिगर का टुकड़ा गुम हुआ तो किसी जीवन संगिनी हमेशा-हमेशा के लिए बिछड़ गई। भगदड़ के दौरान बिछड़े अपनाें की तलाश कई लोगों को रामनगर के लाल बहादुर शास्त्री राजकीय अस्पताल ले आई जहां मृतकों और घायलों को ले आया जा रहा था। सफेद चादर में लिपटे बेजान देह में अपनों की तलाश करते वक्त कई लोगों के हाथ कांपे, धड़कनें मानो थम सी गईं।
सीतापुर की रहने वाले नरपति की पत्नी राधा भगदड़ के दौरान बिछड़ गईं। पहले तो नरपति ने घटनास्थल पर उन्हें तलाशने का प्रयास किया लेकिन वे नहीं मिलीं। किसी ने कहा कि मृतकों और घायलों को राजकीय अस्पताल ले जाया जा रहा है, चाहें तो वहां भी देख लें। राधा को तलाशने वह राजकीय अस्पताल पहुंचे। शवों में राधा को तलाशते वक्त वे फूट-फूटकर रो पड़े। हालांकि यहां भी राधा नहीं मिलीं। पत्नी के जीवित मिलने की आशा में वह फिर कार्यक्रम स्थल पर रवाना हुए। देर रात तक उनकी तलाश जारी रही।
इसी प्रकार भगदड़ में गुम हुए अपने नौ साल के बच्चे कप्तान की तलाश में अस्पताल पहुंचीं प्रतापगढ़ के पुरखापुर की रहने वाली श्यामा देवी। वे बस यही कहकर रोए जा रही थी कि बच्चे की जिद पर उसे साथ लेकर क्यों चली आई..। काश! वह उसे साथ न ले आती...। ऐसे कई और लोग थे जो गुम हुए अपनों की तलाश में अस्पताल पहुंचे। सबसे ज्यादा प्रभावित लोग सीतापुर, बाराबंकी और प्रतापगढ़ के रहे।