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बनारस में 50 हजार की घूस लेते मुख्य वक्फ निरीक्षक गिरफ्तार, वेतन भुगतान के नाम पर मांगे थे छह लाख

Thu, 29 Nov 2018 11:23 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
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प्रबंधक ने भ्रष्टाचार निवारण संगठन के अधिकारियों से शिकायत कर रंगे हाथ पकड़वाया - फोटो : अमर उजाला
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वाराणसी जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के मुख्य वक्फ निरीक्षक सुनील कुमार को 50 हजार रुपये की घूस लेते हुए भ्रष्टाचार निवारण संगठन की टीम ने रंगे हाथ बुधवार दोपहर गिरफ्तार कर लिया। मुकदमा दर्ज कर सुनील को कैंट पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। यह कार्रवाई फूलपुर थाना क्षेत्र के पचरांव स्थित मदरसा इस्लामिया वारसी के प्रबंधक हैदर अली की शिकायत पर की गई है।
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भ्रष्टाचार निवारण संगठन की वाराणसी इकाई में हैदर ने शिकायत दर्ज कराई थी। कहा था कि उनके मदरसे के 12 कर्मचारियों की 18 महीने की तनख्वाह का भुगतान नहीं हुआ है। उन्होंने लखनऊ तक भागदौड़ कर एक करोड़ रुपये से ज्यादा धनराशि स्वीकृत कराई थी।

इसके बाद सुनील कहने लगा कि 10 लाख रुपये उसे दिए जाएं, तभी वह तनख्वाह जारी करेगा। हैदर ने असमर्थता जताई तो सुनील ने कहा कि प्रति कर्मचारी 50 हजार के हिसाब से उसे छह लाख रुपये दिए जाएं। हैदर ने फिर मना किया तो सुनील ने तनख्वाह रिलीज करने से इंकार कर दिया। 
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 इस पर हैदर ने 50 हजार रुपये एडवांस देने की बात कहते हुए सुनील को पुलिस लाइन गेट के सामने बुलाया और उनकी सूचना पर थोड़ी दूर पर भ्रष्टाचार निवारण संगठन के इंस्पेक्टर राम सागर के नेतृत्व में इंस्पेक्टर सरोज पांडेय समेत पूरी टीम खड़ी थी।

हैदर ने सुनील को जैसे ही रुपये दिए, टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया। इंस्पेक्टर ने बताया कि सुनील के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है। कैंट थाना पुलिस सुनील को अदालत में पेश करेगी।
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महीनों से अटका है 30 से ज्यादा शिक्षकों का वेतन

मदरसा शिक्षकों को अपनी ही तनख्वाह पाने के लिए पापड़ बेलने पड़ रहे हैं। शासन स्तर से बजट ही नहीं मिल पाता है लेकिनबजट मिलने के बाद विभाग की ओर से पैसा कमाने के फेर में लेटलतीफी शुरू हो जाती है। तकनीकी कारणों से मदरसा इस्लामिया के शिक्षकों की तनख्वाह पिछले दो साल से शासन से अटकी थी। बजट आने के बाद बंदरबांट के चलते मदरसा प्रबंधक को काफी दिनों से दौड़ाया जा रहा है। फिलहाल बुधवार को मुख्य वक्फ निरीक्षक सुनील कुमार की रिश्वत लेते गिरफ्तारी से विभाग में हड़कंप मच गया है। 

ऐसे ही मदरसा जियाउल उलूम के भी 20 से अधिक शिक्षकों का वेतन तकनीकी कारणों से अरसे से अटका था। खामियां दूर हुई तो इन दोनों ही मदरसों के करीब 30 शिक्षकों का बजट शासन से रिलीज किया गया। बजट को रिलीज करने के लिए जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के मुख्य वक्फ निरीक्षक ने मदरसा इस्लामिया वारसी के प्रबंधक से घूंस मांगी। सूत्रों की मानें तो इसमें अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के कुछ अन्य लोग भी शामिल है। 

उधर, बजट रिलीज न होने के बावजूद कई महीनों से वेतन का इंतजार कर रहे शिक्षकों की हालत बदतर होती जा रही है। जिले के करीब 250 आधुनिक शिक्षकों का भी यही हाल है। कई लोगाें का ढाई साल तो कई का दो साल राज्यांश रुका हुआ है। बीते दिनों इनका चार महीने का बजट आया लेकिन अब तक शिक्षकों को मानदेय नहीं मिल पाया है। 
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