उत्तर प्रदेश के वन एवं पर्यावरण मंत्री दारा सिंह चौहान ने दावा किया है कि प्रयागराज कुंभ से पहले ही गंगा को प्रदूषण मुक्त कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यूपी सरकार के 23 विभाग मिलकर गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के काम में लगे हैं। अगले साल जनवरी में कुंभ से पहले से इंडस्ट्री को माइग्रेट कराकर और शोधन यंत्र लगाकर सीवर सहित अन्य प्रदूषक तत्व गंगा में जाने से हर हाल रोक दिए जाएंगे। प्रयास है कि श्रद्धालु गंगा की निर्मल धारा में स्नान करें।
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में दो दिवसीय पर्यावरण कुंभ के तहत रविवार को हुए समापन सत्र ‘भारतीय जीवन दृष्टि’ में मुख्य अतिथि के तौर पर पर्यावरण मंत्री ने कहा कि गंगा में गिरने वाले नालों के पानी को शोधित करने की दिशा में काम हो रहा है। एक दिन में नौ करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में 22 करोड़ पौधे लगाएंगे। पर्यावरण संरक्षण के लिए ‘वन मैन-वन ट्री’ अभियान चलाया जा रहा है। अवैध कटाने को रोकने के लिए कानून लाया गया है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण कुंभ में आए सुझावों पर प्रदेश सरकार प्रभावी अमल करेगी।
इस दौरान पद्मभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र ने पर्यावरण आधारित गणेश वंदना प्रस्तुत की। अतिथियों ने दो पुस्तकों ‘प्रेरक’ और ‘वेदों में पर्यावरणीय चेतना’ का विमोचन किया। दो दिवसीय आयोजन में पर्यावरण की चुनौतियों, उसके संरक्षण पर चिंतन-मंथन में पाया गया कि प्रकृति और प्राकृतिक संसाधनों को पुन: संरक्षित करने के लिए भारतीय दर्शन और धर्म की ओर लौटना होगा।
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में आयोजित पहले वैचारिक कुंभ का समापन रविवार को हो गया। दो दिवसीय इस पर्यावरण कुंभ में पर्यावरण की चुनौतियों, उसके संरक्षण पर गहन चिंतन मनन किया। विकास के अंधाधुंध दौड़ती भागती जिंदगी के कारण संकट में इस प्रकृति और प्राकृतिक संसाधनों को पुन:संरक्षित करने के लिए एक बार फिर से भारतीय दर्शन, धर्म की ओर लौटने का आह्वान किया गया।
कुंभ में आए वैज्ञानिकों, पर्यावरणविदों ने कई पहलुओं पर चिंतन मनन किया तो पर्यावरण के लिए कार्य करने वाले समाजसेवियाें, सामाजिक संस्थाओं ने लोगाें को प्रेरित करने का काम किया।
रविवार को समापन से पहले तीन वैचारिक सत्र चले। पहले सत्र में ‘उपभोक्ता और पर्यावरण की चुनौतियों’ पर चर्चा हुई।
इस सत्र में गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय नोएडा के कुलपति प्रो. बीपी शर्मा ने कहा कि जल, ऊर्जा, प्राकृतिक स्रोतों का हम बेतहाशा इस्तेमाल कर रहे हैं। 30 प्रतिशत तक अरावली की पहाड़ी गायब हो चुकी है। 2030 के बाद जल संकट गहरा जाएगा। 2045 तक ग्लोबल वार्मिंग के कारण तापमान इतनी तेजी से बढ़ेगा कि मानव जाति खतरे में पड़ जाएगी।
ऐसे में अब वक्त आ गया है कि प्राकृतिक संसाधनों का उतना ही इस्तेमाल करें, जितनी जरूरत हो। भविष्य के लिए उसे संरक्षित करें। अध्यक्षता करते हुए प्रो. लक्ष्मण सिंह राठौर ने कहा कि उपभोगवाद को सबसे बुरा असर पर्यावरण पर पड़ा है। संकल्प लेने होगा कि हम असहमत सिद्धांतों का परित्याग करें।
पूर्वजों की सीख पर दें ध्यान
प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ने कहा कि आज के जमाने के हिसाब से हमारे पूर्वज उतने पढ़े लिखे नहीं थे। बावजूद इसके उन्होंने पर्यावरण को इस प्रकार से संजोकर रखा। पीपल पेड़ को नहीं काटने को कहा, क्योंकि वह 24 घंटे आक्सीजन देता है। हमें उनकी सीख पर ध्यान देना चाहिए।