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दोनों मुल्कों के चंद सियासतदां नहीं चाहते मिल्लत 

Tue, 26 Apr 2016 02:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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पाकिस्तानी गजल गायक गुलाम अली
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भारत और पाकिस्तान के रिश्ते हम कलाकारों के जरिए और मजबूत होंगे। सुरों से सरहद की दूरी कम होगी। दोनों मुल्कों की अवाम मिल्लत चाहती है मगर चंद सियासतदां इसमें बाधक बन रहे हैं। ऐसे हुक्मरान ही हमें करीब नहीं आने दे रहे। हमें उनकी परवाह नहीं करनी चाहिए। यह कहना है कि पाकिस्तान के प्रख्यात गजल गायक उस्ताद गुलाम अली का। सोमवार की शाम वह यहां होटल गेटवे में पत्रकारों से मुखातिब थे। वह संकटमोचन संगीत समारोह में शामिल होने काशी पहुंचे हैं। मंगलवार को मंदिर में उनकी प्रस्तुति होगी। 
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गजल सम्राट गुलाम अली ने कहा कि मैं पूरी दुनिया में घूम चुका हैं। कु छ लोग बहुत प्यारे होते हैं तो कुछ लोग कम प्यारे होते हैं। भारत और पाकिस्तान में भी ऐसा ही है। कहीं बहुत प्यार मिलता है तो कहीं-कहीं थोड़ा विरोध भी होता है। कलाकार का फर्ज है कि वह अपनी फनकारी से लोगों को करीब लाए। मैं और मेरे जैसे कलाकार भी यही काम करते हैं। एक सवाल का जवाब उन्होंने शायराना अंदाज में दिया। बोले, बस के दुश्वार है हर काम का आसान होगा, आदमी को भी मयस्सर नहीं इंसान होना...। कहा कि दोनों मुल्कों की अवाम के बीच मोहब्बत बढ़ती रहे, यही हमारा संदेश है। उनके आगमन को लेकर कुछ संगठनों द्वारा किए गए विरोध से जुड़े सवाल पर पाकिस्तानी गजल गायक ने कहा कि कहा कि अल्लाह ऐसे लोगों को अच्छी सोच दे। 


काशी के लोगों के लिए इस बार कुछ नया लेकर आया हूं
संकटमोचन संगीत समारोह की प्रस्तुति के बारे में उन्होंने कहा कि इस बार वह काशी के लोगों के लिए कुछ नया लेकर आए हैं। उन्हें कुछ ऐसी गजलें सुनाएंगे जो उन्होंने कभी नहीं सुनी होगी। साथ ही उन्होंने तुलसीदास कृत विनय पत्रिका के दोहों का कंपोजिशन किया है। उनकी प्रस्तुति साथी कलाकार विश्वनाथ करेंगे। कहा कि हमें श्रोताओं के अनुसार चलना पड़ता है। श्रोता जो सुनना चाहेंगे हम उन्हें वही सुनाएंगे। 
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