60 रुपये लीटर बिकने वाले सिंथेटिक दूध को बनाने में 20 रुपये आता खर्च
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होली के चलते दूध और उससे बने उत्पाद की मांग कई गुना बढ़ गई है। खपत पूरी करने के लिए बाजार में सिंथेटिक दूध धड़ल्ले से बेचा जा रहा है। जानकारों की मानें तो 50 से 60 रुपये लीटर का मिलावटी सिथेंटिक दूध तैयार करने में मात्र 15 से 20 रुपये का खर्च आता है। इन हालात में दूध लेने से पहले उसकी जांच जरूरी है। अन्यथा इससे कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बड़े पैमाने पर चल रहे इस गोरखधंधे के बावजूद प्रशासन मूक दर्शक बना हुआ है।
ऐसे तैयार करते हैं सिंथेटिक दूध
पानी में मिल्क पाउडर डालने के बाद चिकनाई लाने के लिए शैंपू व डिटर्जेंट पाउडर डालते हैं। रिफाइंड तेल की एक पैकेट डालते हैं। धीरे-धीरे यह सफेद रंग गाढ़े पेस्ट में तब्दील हो जाता है। फिर पानी मिलाकर दूध तैयार कर लेते हैं। दूधिए पकड़े जाने के डर से करीब 20 फीसदी असली दूध भी डालते हैं।
सपरेटा दूध से क्रीम निकालने के बाद पनीर को तैयार किया जा रहा है। मिलावटखोर सपरेटा दूध बनाने के बाद उसे गर्म करते हैं इसके बाद दूध को फाड़ने के लिए साटरी व टाटरी मिलाते हैं। पनीर में चिकनाई लाने के लिए रिफाइंड मिलाते हैं।
पराग कंपना के जीएम आरपी सिंह ने बताया कि दूध के असली होने की सबसे बड़ी पहचान उसका स्वाद होता है। इसके अलावा केमिकल टेस्ट, टेस्टिंग स्ट्रिप आदि विधियों के माध्यम से मिलावटी दूध की पहचान की जा सकती है। अंगुलियों पर रगड़ने पर असली दूध में चिकनाई होती है। वहीं सपाट शीशे पर असली दूध की बूंद गिराने पर वह स्थिर रहता है। जबकि नकली दूध के साथ ऐसा नही होता।
कहीं आपको कर ना दे बीमार
दीनदयाल अस्पताल के फिजीशियन डॉ. पीके सिंह ने बताया कि पुरुष-महिला हो या बच्चा सिंथेटिक दूध, इससे बनी सामग्री से बचना चाहिए। इसमें इस तरह केमिकल होते हैं कि इसका प्रयोग करने पर इसका सीधा अटैक लीवर, किडनी पर होता है। अक्सर त्योहार पर बाजार में मिलावटी सामान अधिक खपाए जाते हैं।
गुझिया की मिठास में सिंथेटिक खोवे की ‘खटास’
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होली की गुझिया का मजा तो खूब लीजिए लेकिन सावधानी के साथ। कहीं मिलावटी खोवा आपकी सेहत खराब न कर दे। ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में बाजार में सिंथेटिक खोवे की सप्लाई खुलेआम हो रही है।
आम दिनों में जहां 50 से 60 क्विंटल खोवे की खपत होती है वहीं, शादी-विवाह व तीज-त्योहार पर बढ़कर करीब चार गुना हो जाती है। इनकी रोकथाम के लिए जिम्मेदार विभाग मूक दर्शक बना हुआ है।
मिलावटी खोवा खाने से पेट में अल्सर जैसे घाव हो जा रहे हैं। तेलियाबाग के राजन सिंह, जगतगंज के रोहित, चांदपुर के मयंक आदि ने बताया कि मिलावटी खोवा देखने में हूबहू असली जैसा लगता है पर स्वाद से उसके नकली होने का अंदाजा लग जाता है।
ऐसे करें असली नकली की पहचान-
- खोवा को अपने अंगूठे के नाखून पर रगड़ें, अगर यह असली है तो इसमें से घी की महक आएगी और खुशबू देर तक रहेगी।
- हथेली पर खोया की गोली बनाएं, अगर यह फटने लग जाए तो समझिए नकली है।
- दो ग्राम मावा को पांच मिलीलीटर गरम पानी में घोल लें और इसे ठंडा होने दें। ठंडा होने के बाद इसमें आयोडीन सोल्यूशन डालें, अगर खोवा नकली होगा तो इसका रंग नीला हो जाएगा।
- मावे में थोड़ी चीनी डालकर गरम करें अगर यह पानी छोड़ने लगे तो यह नकली है।
- थोड़ा मावा आप खाकर देखिए अगर असली होगा तो मुंह में नहीं चिपकेगा जबकि नकली मावा चिपक जाएगा।
- असली मावे को खाने पर कच्चे दूध जैसा टेस्ट आएगा।
- नकली खोवे के परखने के लिए पानी में डालकर फेंटने से वह दानेदार टुकड़ों में अलग हो जाएगा।
ऐसे तैयार होता है सिंथेटिक खोवा
- सिंथेटिक खोवा तैयार करने के लिए उबाला आलू, सोडा, वेजीटेबल आयल, बेकिंग पाउडर डालकर तैयार करते हैं। गर्मियों के दिन में दूध व खोवा खराब न हो इसके लिए वह कुछ बूंद फार्मोलिन के भी डालते हैं।