किस्म-किस्म की चर्चाओं का केंद्र रही मेट्रो रेल कॉरिडोर योजना की रफ्तार धीमी पड़ गई है। डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार होने और प्रदेश सरकार से कैबिनेट की मंजूरी मिलने के करीब तीन महीने बाद भी योजना एक कदम आगे नहीं बढ़ पाई है। अब तक यही तय नहीं हो पाया है कि इसके निर्माण पर कितनी धनराशि केंद्र और कितना राज्य सरकार खर्च करेगी। प्रदेश सरकार ने बजट में 50 करोड़ का प्रावधान कर पल्ला झाड़ लिया है, जबकि इस योजना पर 17 हजार 500 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान डीपीआर में लगाया गया है।
मेट्रो रेल कॉरिडोर के लिए जब काम शुरू हुआ था तो इस पर 12256 करोड़ खर्च होने का अनुमान लगाया गया था लेकिन डीपीआर फाइनल हुई तो लागत बढ़कर 17500 करोड़ हो गई। वीडीए के नगर नियोजक वीके सक्सेना की मानें तो डीपीआर पर करीब 3.50 करोड़ रुपये खर्च हुए। इसे वीडीए ने ही वहन किया। धनराशि कहां से आएगी, इस पर अब तक स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। अक्तूबर-नवंबर से कॉरिडोर का काम शुरू होना था। पहले चरण की मेट्रो को 2021 तक दौड़ाने के वादे किए गए थे लेकिन केेंद्र और राज्य की धीमी चाल देखकर इस पर काम शुरू होने को लेकर ही संशय है।