घरों-दुकानों से निकलने वाले कूड़े-कचरे से अब बनारस में मेथेनॉल तैयार कराया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी आईआईटी बीएचयू को दी गई है। पहले चरण में गोरखपुर-बनारस में मेथेनॉल बनवाया जाएगा। आईआईटी बीएचयू में प्रो. पीके मिश्रा के निर्देशन में इसका प्रोजेक्ट तैयार हो रहा है। इसका मॉडल बनाकर प्रदेश सरकार को भेजा जाएगा।
मेथेनॉल एक कार्बनिक यौगिक है। इसे मेथिक अल्कोल भी कहा जाता है। अमूमन इसका प्रयोग बायोडीजल उत्पादन में किया जाता है। पहले खेतों में फसल की कटाई के बाद पहले एथेनॉल बनाया जाता था। अब सरकार ने सालिड वेस्ट मैटेरियल (कूड़ा-कचरा) से मेथेनॉल बनाने का निर्णय लिया है।
करीब 50 करोड़ की लागत से इसके लिए प्लांट लगाया जाएगा। बायो एनर्जी डेवपलमेंट बोर्ड के सहयोग से इस प्रोजेक्ट को तैयार करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। प्रो. मिश्रा ने बताया कि प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद प्लांट का मॉडल तैयार करने सहित अन्य औपचारिकताएं चल रही हैं।
पहले कोयले के पत्थर से गैस बनाई जाएगी। इसके बाद इसे प्यूरीफाई किया जाएगा। इसके बाद मेथेनॉल बनेगा। इस काम में एनसीएल (नेशनल केमिकल लैब) पुणे की टीम भी सहयोग करेगी।