संगीत के शहर में शुमार बनारस ने सांस्कृतिक सद्भाव के एवरेस्ट पर पताका लहराने में कामयाबी हासिल की। इसके दूरवर्ती सकारात्मक परिणाम देखे जा रहे हैं। राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव में जहां 19 से अधिक पद्म सम्मान से विभूषित हस्तियों ने सुर, लय , ताल से काशी की संगीत परंपरा को सींच कर आनंद की वर्षा की।
वहीं नृत्यांगना सोनी चौरसिया ने 126.05 घंटे के अपने मैराथन नृत्य से त्रिचूर की मोहिनी अट्टम नृत्यांगना हेमलता कमंडलु के 123.20 घंटे के नृत्य के रिकार्ड को तोड़कर कीर्तिमान बनाया।
तो संगीत, साहित्य से जुड़ी छह हस्तियों को पद्म सम्मान से अलंकृत किया गया। आठ विभूतियों को प्रदेश सरकार ने यश भारती से नवाज कर काशी की गरिमा का मान रखा।
काशी विश्वनाथ मंदिर, संकट मोचन और अन्नपूर्णा धाम से बनारस घराने की संगीत परंपरा को नई ऊंचाई मिलने की उम्मीद है। धर्म की नगरी से सामाजिक सद्भाव की मिसाल इस बार भी पेश की गई।
संकट मोचन मंदिर प्रबंधन ने पाकिस्तानी गजल गायक उस्ताद गुलाम अली को विश्व विख्यात संकट मोचन संगीत समारोह के मंच पर तमाम विरोधों के बाद भी उतार कर सद्भाव की दिशा में मिसाल कायम की।
संस्कृति मंत्रालय की ओर से काशी में पहली बार राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव आयोजित किया गया और इसमें पीएम नरेंद्र मोदी खुद कलाकारों का उत्साह बढ़ाने के लिए पहुंचे। इस महोत्सव में देश को चोटी के कलाकारों ने अपनी संगीत साधना का परचम लहराया।
पद्म विभूषण पंडित जसराज, ठुमरी साम्राज्ञी पद्मविभूषण गिरिजा देवी, पद्मभूषण पं. राजन-साजन मिश्र, पद्मभूषण पं. छन्नूलाल मिश्र, ओडिसी नृत्यांगना पद्मभूषण सोनल मानसिंह, संतूर वादक पद्मश्री भजन सोपोरी, तबला वादक पद्मश्री सुरेश तलवरकर, पद्मश्री विश्व मोहन भट्ट, प्रभा आत्रे, पद्मश्री वडाली बंधु के अलावा महाभारत के श्रीकृष्ण के अभिनय से सजी चक्रव्यूह नाटक और मनोज जोशी के चाणक्य नाटक की प्रस्तुतियां यादगार बन गईं।