नए साल के पहले दिन से ही मौसम का मिजाज तेजी से बदला है। जहा नम पछुआ हवाओं के चलने से गलन बढ़ गई है वही चार दिन से सूरज ने भी मुंह मोड़ लिया है। बुधवार को भी सुबह इसी तरह का मौसम देखने को मिला। करीब 10 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलती रही। हालांकि कोहरा तो नहीं दिखा लेकिन हवा में नमी ज्यादा होने से ठंड भी अधिक लग रही थी। बीएचयू के मौसम वैज्ञानिक प्रो.मनोज श्रीवास्तव का कहना है कि उत्तर पश्चिमी हवाओं की वजह से ही मौसम में बदलाव हुआ है। तीन चार दिन तक ऐसे ही मौसम बने रहने के आसार हैं। शीतलहर के साथ ही तापमान में कमी हो सकती है।
वाराणसी में मौसम
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नम पछुआ हवाओं की रफ्तार बढ़ी, गलन ने कंपाया
पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी और पछुआ हवाओं की रफ्तार बढ़ने की वजह से शीतलहर का प्रकोप लगातार तीसरे दिन जारी रहा। मंगलवार को हवा में नमी अधिक होने के कारण गलन भी ज्यादा लग रही थी। दोपहर में थोड़ा मौसम साफ हुआ और लगा कि धूप निकलेगी लेकिन रविवार, सोमवार की तरह मंगलवार को भी पूरे दिन धूप गायब रही।
मंगलवार को सुबह और शाम को लगभग 10 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने से कंपकंपी अधिक महसूस हुई। मंगलवार को सुबह बादलों की आवाजाही भी रही, लगा जैसे बूंदाबांदी होगी, लेकिन शाम तक मौसम वैसा ही रहा। शहर और ग्रामीण इलाके में लोग ठंड से बचाव के लिए अधिक से अधिक गर्म कपड़ा पहनकर बाहर निकले। कई लोग अलाव जलाकर उसके पास बैठे नजर आए। सोमवार को अधिकतम तापमान 15.5 डिग्री सेल्सियस की जगह मंगलवार को 16.5 रिकार्ड किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 10.5 की जगह बुधवार को 10.4 रहा। मौसम वैज्ञानिक एसएन पांडेय ने बताया कि सतह से एक कि लोमीटर तक 10 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पछुआ हवा चल रही है। इसके बाद बंगाल की खाड़ी से आने वाली उत्तर-पूर्वी हवाएं चलने का असर है कि बादल भी दिख रहे हैं। दो से तीन दिन तक शीतलहर और घने कोहरे के साथ ही तापमान में और कमी हो सकती है।