मोहम्मद शाहिद को भारत सरकार ने 1980 में अर्जुन अवॉर्ड और 1986 में पद्मश्री से सम्मानित किया था। उनके ये सम्मान भी संग्रहालय की शोभा बढ़ाएंगे। उन्होंने वर्ष 1979 में पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फ्रांस में आयोजित जूनियर वर्ल्ड कप में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। वे 1982 एशियाई खेलों में रजत पदक और 1986 एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय टीम का भी हिस्सा रहे। ओलंपियन के सभी पदक और सम्मान संग्रहालय में रखे जाएंगे।
तीन ओलंपिक में भारत का किया प्रतिनिधित्व
मोहम्मद शाहिद ने 1980 में मॉस्को, 1984 में लॉस एंजिलिस और 1988 में सियोल ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। 1979 से 1989 तक उन्होंने 167 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 66 गोल किए। 1986 में लंदन में आयोजित हॉकी विश्व कप में उन्हें सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी घोषित किया गया था। वर्ष 1985 से 1986 तक वे भारतीय हॉकी टीम के कप्तान भी रहे। उनका जन्म 14 अप्रैल 1960 को वाराणसी में हुआ था। 20 जुलाई 2016 को हरियाणा के मेदांता अस्पताल में उनका निधन हुआ।
हॉकी से संन्यास लेने के बाद वे बरेका (बनारस रेल इंजन कारखाना) में वरिष्ठ क्रीड़ा अधिकारी के पद पर कार्यरत रहे। उनके निधन के बाद खेल निदेशालय, उत्तर प्रदेश हर वर्ष वाराणसी में अखिल भारतीय पद्मश्री मोहम्मद शाहिद प्राइज मनी हॉकी प्रतियोगिता का आयोजन करता है। हॉकी वाराणसी के अध्यक्ष डॉ. एके सिंह और सचिव के.बी. रावत ने बताया कि मोहम्मद शाहिद का संग्रहालय बन जाने से युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी। उन्हें मास्टर ऑफ ड्रिब्लिंग कहा जाता था।
सभी खेलों के दिग्गजों को मिले सम्मान
पूर्व ओलंपियन राहुल सिंह ने कहा कि संग्रहालय में सभी खेलों के दिग्गजों को सम्मान मिलना चाहिए। काशी के स्वर्गीय विवेक सिंह ने भी ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया था, उनकी स्मृतियां भी वहां होनी चाहिए। इसके अलावा कुश्ती और एथलेटिक्स में काशी का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों की उपलब्धियों को भी संग्रहालय में संरक्षित किया जाना चाहिए।