फर्जी इंटर्नशिप में फंसे डाक्टर
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विदेशों में एमबीबीएस की डिग्री हासिल करने वाले डाक्टरों की इंटर्नशिप प्रमाणपत्र में फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा हुआ है। यह मामला जौनपुर से जुड़ा हुआ है। जौनपुर के शहीद उमानाथ सिंह पुरुष चिकित्सालय से जालसाजों ने सैकड़ों इंटर्नशिप प्रमाणपत्र जारी कर दिए हैं। हैरत की बात यह है कि इस बारे में अस्पताल के अधिकारियों को कुछ पता नहीं है।
दिल्ली मेडिकल काउंसिल के सत्यापन में इस बात का खुलासा होने पर अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया है। दरअसल, रूस, यूक्रेन, कजाकिस्तान आदि देशों से एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले प्रशिक्षु डाक्टरों को सरकारी जिला अस्पतालों में एक साल का इंटर्नशिप करना अगली पढ़ाई के लिए अनिवार्य होता है। इसके लिए एनओसी लेकर उन्हें महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य के यहां आवेदन करना होता है। यहीं से इंटर्नशिप के लिए आदेश दिया जाता है।
विदेशों से पढ़ाई करने वाले सैकड़ों छात्रों ने दिल्ली के विभिन्न मेडिकल कॉलेज से पीजी करने के लिए जिला अस्पताल जौनपुर का प्रमाणपत्र लगाकर दिल्ली मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराया है। बड़े पैमाने पर जौनपुर जिला अस्पताल का प्रमाण पत्र प्रस्तुत होने पर दिल्ली मेडिकल काउंसिल के अधिकारियों को शक हुआ तो उन्होंने सत्यापन के लिए कुछ प्रमाणपत्रों को जौनपुर जिला अस्पताल भेजा।
इसमें 27 से अधिक प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने के बाद हड़कंप मच गया है। ये प्रमाणपत्र वर्ष 2015-16 में जारी किए गए हैं। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. एसके पांडेय का कहना है कि पिछले दो सालों से कोई इंटर्नशिप नहीं हो रही है।
जो प्रमाणपत्र सत्यापन में आए हैं वे फर्जी हैं। इसकी रिपोर्ट दिल्ली मेडिकल काउंसिल को भेज दी गई है। शेष प्रमाणपत्रों की जांच की जा रही है।
वहीं इस मामले में जौनपुर डीएम भानुचंद्र गोस्वामी ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है। इसके पीछे कोई रैकेट काम कर रहा है। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। जो भी इसमें लिप्त होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।