इस मास में संगम स्नान अन्य युगों से अन्नंत पुण्यदायी होगा। इस तिथि को पवित्र नदियों में स्नान के पश्चात् अपने सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र, धन, गौ, भूमि, तथा स्वर्ण अपनी इच्छानुसार दान करना चाहिए। मौनी अमावस्या को तिल का दान भी उत्तम माना जाता है। चूंकि इस व्रत में व्रत करने वाले को पूरे दिन मौन व्रत का पालन करना होता इसलिए यह योग पर आधारित व्रत कहलाता है।
मौनी अमावस्या पर मौन रखकर स्नान-दान करना चाहिए। ज्येातिषविद् विमल जैन के अनुसार चावल, दूध, मिश्री, चीनी, खोवे से बने सफेद मिष्ठान, सफेद वस्त्र, चांदी एवं अन्य सफेद रंग की वस्तुएं दक्षिणा के रूप में देना चाहिए। यदि ब्राह्मण को भोजन न करवा सकें तो उन्हें भोजन सामग्री के साथ नकद द्रव्य देकर पुण्यलाभ प्राप्त करना चाहिए।
चार हैं अमृत स्नान
मकर संक्रांति के बाद अभी चार अमृत स्नान बचे हें। मौनी अमावस्या, तीन फरवरी को बसंत पंचमी, 12 फरवरी माघी पूर्णिमा एवं 26 फरवरी को महाशिवरात्रि का अमृत स्नान होगा।