अष्टभुजा पहाड़ी पर है सीता कुंड
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धर्मनगरी काशी एवं प्रयागराज के मध्य स्थित विंध्य क्षेत्र में मां सीता ने श्राद्ध तर्पण किया था, जिसे सीता कुंड के नाम से जाना जाता है। सीताकुंड के पुजारी राजेश दुबे ने बताया वनगमन के दौरान भगवान राम, लक्ष्मण और सीता इसी रास्ते से गुजरे थे। अष्टभुजा पहाड़ पर भगवान राम, लक्ष्मण माता सीता को छोड़कर गंगा की ओर स्नान के लिए के लिए निकल गए।
इसी बीच माता सीता ने पूर्वजों को याद किया। याद करते ही सभी पितर उपस्थित हो गए। तर्पण के लिए जल की आवश्यकता पड़ती है। माता ने पहाड़ पर जल प्रकट किया। उसी जल से पितरों के लिए तर्पण किया। पुजारी राजेश दुबे ने कहा तभी से मातृ नवमी पर यहां महिलाओं के द्वारा तर्पण कार्य शुरु किया गया जो आज भी जारी है।
मातृ नवमी पर शनिवार सुबह 10 बजे तक सीताकुंड की सुरक्षा व्यवस्था मात्र एक होमगार्ड के भरोसे दिखी। काफी भीड़ होने के बावजूद सीताकुंड के आसपास पुलिस नदारद रही। मुख्य सीढ़ी व सीताकुंड के आसपास बंदरों का तांडव रहा। कई महिला श्रद्धालुओं को बंदर ने काट लिया। बंदरों के दौड़ाने से एक महिला सीढ़ी पर गिरकर बेहोश हो गई। महिला काफी देर तक बेसुध पड़ी रही कोई पूछने वाला नहीं दिखा। सीताकुंड के आसपास उपचार का भी कोई प्रबंध नहीं दिखा।