वासंतिक नवरात्र की पंचमी तिथि पर सोमवार को काशी में मौजूद 51 शक्तिपीठों में एक माता विशालाक्षी गौरी के दर्शन-पूजन के लिए भक्तों की भीड़ रही। सुबह से रात तक दर्शन के लिए कतार लगी रही। भक्तों ने दर्शन कर मां से जन्म जन्मांतर के पाप से मुक्ति की कामना की। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर से आए शृंगार की सामग्री से माता विशालाक्षी गौरी का शृंगार हुआ। 19 घंटे माता के दर्शन हुए। उधर, नव दुर्गा के दर्शन के क्रम में भक्तों ने बुद्धि और विवेक की देवी मां स्कंदमाता के दर्शन किए।
मीरघाट क्षेत्र में धर्मकूप के पास विशालाक्षी गौरी मंदिर में भोर से शयन आरती तक दर्शन पूजन का सिलसिला चलता रहा। विश्वनाथ मंदिर के करीब होने के कारण दर्शन के लिए काफी भीड़ रही। माता के दर्शन के लिए दूर-दराज के भक्त रात में ही पहुंच गए थे। मंदिर के महंत राजनाथ तिवारी ने बताया कि ब्रह्म मुहूर्त में मां का पंचामृत स्नान कर नवीन वस्त्र व आभूषण धारण कराया गया।
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देवी को प्रिय पुष्प गुड़हल और कमल से शृंगार हुआ। फल, मिष्ठान आदि अर्पण कर विधिवत पूजन कर मंगला आरती हुई। मंदिर के पट भोर में चार बजे खुलते ही पूरा वातावरण देवी के जयकारे से गूंज उठा। भोग आरती के समय कुछ देर के लिए दर्शन रुका था। रात में 12 बजे शयन आरती के समय भी भीड़ रही। उधर, जैतपुरा में स्थित मां स्कंदमाता के दर्शन के लिए भी काफी भीड़ रही। भक्तों की दिनभर कतार लगी रही। भक्तों ने माता से बुद्धि, विवेक और सुख-समृद्धि की कामना की।