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शहादत: 50 लोगों को फांसी पर लटकाया, 18 मारे गए गोली से, 563 को सुनाई गई सजा; यहां पढ़ें चोलापुर थाने का इतिहास

Sat, 10 Aug 2024 03:41 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: देश की आजादी में बनारस के लोगों का भी महत्वपूर्ण स्थान रहा है। भारत छोड़ो आंदोलन का नारा गली-गली में गूंज रहा था। 17 अगस्त, 1942 को चोलापुर थाने में झंडा फहराने के बाद पुलिस ने फायरिंग शुरू कर दी थी। आइए जानते हैं उसके बाद क्या हुआ था...
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अगस्त क्रांति में काशी का स्थान। - फोटो : PIB
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विस्तार
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भारत छोड़ो आंदोलन की आग बनारस की गलियों से लेकर गांव तक फैल चुकी थी। काशी की जनता के साथ ही कण-कण फिरंगियों को देश से बाहर खदेड़ने के लिए संकल्पित हो चुका था। समाज का हर वर्ग एकजुट होकर कुर्बानी देने के लिए तत्पर था।

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अगस्त क्रांति की बहुत बड़ी कीमत काशीवासियों को चुकानी पड़ी थी। अगस्त क्रांति में बनारस जिले से 18 लोग गोली से शहीद हुए। 50 फांसी पर लटका दिए गए। 85 गंभीर रूप से घायल हुए। 23 जगहों पर पुलिस ने 2002 राउंड फायरिंग की। 22.42 लाख रुपये काशीवासियों पर सामूहिक जुर्माना ठोंका गया। इसके अलावा 563 को सजा सुनाई गई और 117 तड़ी पार किए गए।

बनारस के क्रांतिकारियों पर स्वतंत्र तौर पर शोध कर रहे बनारस बार के पूर्व महामंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि हरहुआ विकास खंड के आयर गांव में वीरबहादुर सिंह के नेतृत्व में आजादी के परवानों ने चोलापुर थाने पर तिरंगा फहराने का निश्चय किया। 
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17 अगस्त, 1942 को नागपंचमी के दिन हजारों का हुजूम अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा बुलंद करते चोलापुर थाने पर चढ़ गया। झंडा फहराने के प्रयास में पांच लोग पुलिस फायरिंग में मारे गए और 27 लोग घायल हुए। तब के डीएम ने बहुत से लोगों को खंभे से बांध कर पिटवाया मगर लोगों के हौसलों को दबा नहीं पाया। फायरिंग में शहीद होने वालों में आयर के रामनरेश उपाध्याय, बेनीपुर के पंचम राम, शिवरामपुर के श्रीराम बच्चू, चौथी नोनिया, सुलेमापुर के निरहु थे।

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पुलिस ने बिना चेतावनी शुरू कर दी फायरिंग
सैयदराजा (अब चंदौली में) में 28 अगस्त को जगत नारायण दुबे के नेतृत्व में रामलीला मैदान में हजारों की संख्या में लोग पहुंचे। पुलिस ने बिना चेतावनी फायरिंग शुरू कर दी। जगत नारायण दुबे समेत 15 लोग घायल हुए। दुबे के बाद सैयदराजा की कमान चंद्रिका शर्मा ने संभाली। 

चंद्रिका शर्मा के नेतृत्व में हजारों की भीड़ थाने पर चढ़ गई। थानेदार ने फायरिंग का आदेश दिया। दो घंटे तक पुलिस गोलियां चलाती रही। 40 लोग घायल हुए। फरार लोगों की तलाश में नजदीक के गांवों में छापे पड़ने लगे। गांव के गांव जला दिए गए। लोगों पर तरह-तरह के जुल्म किए गए। दुकानदार दुकान छोड़कर भाग गए। महिलाओं को थाने में लाकर बंद कर दिया गया। गांव के गांव पर सामूहिक जुर्माना लगा।
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