यूपी में मऊ जिले के निवासी अंबरीश राय देश की रक्षा के लिए 6 जून 2016 में सियाचीन ग्लेशियर में दुश्मन देश के सैनिकों को मुंहतोड़ जवाब देते हुए शहीद हो गए। उसके बाद से अंबरीश राय की विधवा ज्योत्सना अपनी दो बेटियों के साथ मायके कोलकाता में गुजर कर रही है। बड़ी बेटी आठ और छोटी बेटी छह साल की थी तभी अंबरीश दुश्मनों लड़ते हुए शहीद हुए।
शहीद के पिता के नाम की अचल संपत्ति में अब केवल सहरोज में पुश्तैनी मकान ही बिकने से बचा है। शहीद के पिता अपनी विवाहिता बेटियों के पास ही रहते हैं। सारे खेत बिक चुके हैं। मकान मुकदमे के चलते बच गया है। विधवा अभी कभार अपने पति के चाचा बलिराम राय के घर पर किसी कार्यक्रम में भाग लेने के लिए आती है।
शहीद के चाचा बलिराम राय की पीड़ा है कि सरकार ने शहीद के परिवार अथवा उसके नाम पर कुछ भी नहीं किया। इससे पूरे गांव वासियों में आक्रोश है। सहरोज गांव निवासी अंबरीश राय के पिता नारद राय बंगाल में बिरला ग्रुप में नौकरी करते थे।
वहीं पर अंबरीश की शिक्षा दीक्षा हुई। वहीं से अबंरीश सेना में आर्टिलरी में भर्ती हो गया। वहीं पर उसकी शादी बिहार निवासी भोला तिवारी की बेँटी ज्योत्सना से हो गई। ज्योत्सना की बेटी आराधना दस साल और छोटी बेटी एसानी आठ साल की है।
गांव के लोग बताते हैं कि अंबरीश इकलौता बेटा था और उसकी दो बहनें हैं जो शादी शुदा हैं। अंबरीश की मां का भी देहांत हो चुका है। पिता बेटियों के साथ रहते हैं। शहीद के चाचा के अनुसार ज्योत्सना बताती हैं कि दोनों बेटियों के भविष्य के लिए वे चिंतित हैं। पति की पेंशन की मदद से वे बेटियों को पढ़ा रही हैं।