यूपी के आजमगढ़ जिले के रामसमुझ यादव ने जिस तारीख को उनका जन्म लिया उसी तारीख को ही 22 वर्ष की उम्र में अपने प्राण देश के लिए न्यौछाबर कर दिए। परिवार वालों को बेटे के बलिदान पर गर्व है।
वहीं उस मां के दर्द को कोई बयां भी नहीं किया सकता है, जिसके बेटे ने भरी जवानी में अपने प्राण देश की सुरक्षा के लिए गवां दिए हो। पिता का दर्द भी कम नहीं होगा क्योंकि उन्होंने अपने जवान बेटे की अर्थी को कंधा दिया हो। सरकार ने परिवार के लिए बहुत कुछ दिया लेकिन आज भी परिवार को शहीद रामसमुझ यादव की कमी खलती है।
जिले के सगड़ी तहसील के नत्थूपुर गांव में आर्थिक रूप से पिछड़े राजनाथ यादव के परिवार में रामसमुझ यादव 30 अगस्त 1977 को जन्म लिया था। घर के बड़े बेटे होने के कारण घर की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्होंने कड़ी मेहनत और मजदूरी कर अपनी पढ़ाई को पूरी की।
उनके मन में देश सेवा की भावना प्रबल थी। इस जज्बे को परवान चढ़ाने के लिए उन्होंने 1997 में आर्मी ज्वाइन की। उनके आर्मी ज्वाइन करने के बाद घर की आर्थिक स्थिति सुधरने लगी। छोटे भाई प्रमोद यादव, छोटी बहन मीना की पढ़ाई आराम से होने लगी। अब परिवार के लोग उनकी शादी के लिए लड़की तलाश करने लगे थे।