फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

वाराणसी और गाजीपुर के शहीदों को दी गई अंतिम विदाई, नम आंखों से हजारों ने श्रद्धांजलि

Tue, 22 May 2018 10:41 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
विज्ञापन
शहीद का पार्थिव शरीर पहुंचने पर हर आंख नम हो गईं - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
 छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में शहीद जवान रविनाथ पटेल और अर्जुन राजभर का पार्थिव शरीर सोमवार शाम उनके पैतृक गांव पहुंचने पर अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि देने के लिए लोग उमड़ पड़े। नम आंखों से लोगों ने अंतिम विदाई दी।
विज्ञापन


वाराणसी के दल्लीपुर बसनी गांव निवासी शहीद रविनाथ पटेल का पार्थिव शरीर सोमवार को पांच बजे पैतृक गांव पहुंचा। यहां शहीद के अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोग पहुंचे।  95वीं बटालियन सीआरपीएफ वाराणसी के जवानों ने शहीद को गार्ड ऑफ आनर दिया। राज्यमंत्री नीलकंठ तिवारी, डीएम, एसएसपी ने श्रद्धांजलि दी। मणिकर्णिका घाट पर शहीद का अंतिम संस्कार किया गया। 

 गाजीपुर के शादियाबाद के बरईपारा निवासी अर्जुन राजभर का पार्थिव शरीर सोमवार को शाम सात बजकर 40 मिनट पर पैतृक गांव पहुंचा। कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर, राज्यमंत्री अनिल राजभर, विधायक त्रिवेणी राम और डीएम, एसपी और अन्य ने श्रद्धांजलि दी। शहीद की अंतिम यात्रा में हजारों लोग शामिल हुए। गाजीपुर स्थित श्मशान घाट पर शहीद का अंतिम संस्कार किया गया।  
विज्ञापन

बहन का रिश्ता तय करने आने वाला था बनारस का लाल

अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे हजारों लोग, गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया - फोटो : अमर उजाला
शहीद जवान रविनाथ पटेल अपनी बहन सरिता की शादी का रिश्ता तय करने के लिए 24 मई को वाराणसी स्थित अपने घर आने वाला था। परिजनों ने बताया कि 30 मई को सगे संबंधियों के साथ वह शादी का रिश्ता तय करने के लिए रामनगर वाराणसी जाने वाला था लेकिन इच्छा पूरी होने के पूर्व ही वह दुनिया से विदा हो गया।

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में शहीद जवान रविनाथ का पार्थिव शरीर सोमवार को शाम पांच बजे पैतृक गांव दल्लीपुर बसनी पहुंचा। शहीद के अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोग उमड़ पडे़ । 95 वीं बटालियन सीआरपीएफ वाराणसी के जवानों ने शहीद जवान को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। राज्यमंत्री नीलकंठ तिवारी, डीएम, एसएसपी सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने पार्थिव शरीर पर पुष्प गुच्छ अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

जिलाधिकारी ने मुख्यमंत्री राहत कोष से शहीद के पिता राम प्रसाद के खाते में 20 लाख रुपये ट्रांसफर कर आरटीजीएस का प्रमाणपत्र प्रदान किया। राज्य मंत्री नीलकंठ तिवारी ने परिवार के एक सदस्य को नौकरी के साथ गांव में शहीद का स्मारक बनाने की घोषणा की।

पार्थिव शरीर को अंत्येष्टि के लिए शाम 6 बजे मणिकर्णिका घाट के लिए रवाना किया गया। इसके पहले पूर्व मंत्री सुरेंद्र पटेल, पूर्व विधायक अजय राय, ललितेशपति त्रिपाठी, सतीश चौबे, हंसराज विश्वकर्मा, प्रजानाथ शर्मा ने घर पहुंच कर परिजनों को ढांढस बधाया। 

उधर, घर पर सुबह से ही शोक संवेदना व्यक्त करने वालों का तांता लगा रहा। तहसीलदार कौशलेंद्र मिश्रा व नायब तहसीलदार आलोक रंजन सिंह, सीओ बड़ागांव शफीक अहमद खान ने शहीद जवान के घर पहुंच कर परिजनों को ढांढ़स बधाया। शहीद जवान का भाई कोलकाता से घर पहुंच गया। माता-पिता व बहन सरिता रो-रोकर बेहाल थे।

दुकानें बंद कर दी श्रद्धांजलि
शहीद का पार्थिव शरीर पहुंचने पर हर आंख नम हो गईं। सुबह से ही व्यापार मंडल बसनी के आह्वान पर व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद रख शहीद को श्रद्धांजलि दी। एक शिक्षण संस्थान के संचालक पद्माकर मिश्रा, सचिन मिश्रा सहित छात्रों ने दो मिनट का मौन रहकर शहीद जवान को श्रद्धांजलि अर्पित कर संस्थान बंद कर दिया।
 

भतीजी की डोली को कंधा देने की हरसत रह गई अधूरी

दस जून को घर आने के लिए कराया था टिकट - फोटो : अमर उजाला
अपने बड़े भाई रामाश्रय राजभर की बेटी की डोली को कंधा देने की हसरत दंतेवाड़ा के शहीद अर्जुन राजभर के मन में ही रह गई। 20 जून को भतीजी की शादी में शामिल होने के लिए अर्जुन ने दस दिन पहले ही ट्रेन का आरक्षित टिकट करा लिया था।

उसने घर वालों से 10 जून को चलने की बात कही थी, लेकिन अर्जुन की यह हसरत अधूरी रह गई, क्योंकि अर्जुन दंतेवाड़ा में हुए बारूदी सुरंग विस्फोट में रविवार को शहीद हो गया। 

गाजीपुर जिले के बरईपारा निवासी बलिराम राजभर के पांच बेटे रामाश्रय राजभर, अमरनाथ, शिवशंकर, अर्जुन राजभर और रामकेश में से तीन बेटे रामाश्रय राजभर, अमरनाथ और शिवशंकर मुंबई में रहकर काम करते हैं।

जबकि अर्जुन राजभर और रामकेश राजभर गांव में ही टेंट की दुकान चलाते थे। लेकिन देश की सेवा करने का जज्बा पाल चुके अर्जुन राजभर फौज जाने का प्रयास नहीं छोड़े और वर्ष 2014 में छत्तीसगढ़ के 16वीं बटालियन में सिपाही के पद पर तैनात हो गए।

गांव में टेंट की दुकान उनके छोटे भाई रामकेश ही चला रहे थे। शहीद अर्जुन राजभर की शादी वर्ष 2000 में खुटहन उर्फ पथरा में सुनीता राजभर से हुई थी। बीते अप्रैल माह में छुट्टी लेकर घर आए अर्जुन 20 अप्रैल को अपनी पत्नी सुनीता, पुत्री कविता, बेटे अजय और अभय को लेकर छत्तीसगढ़ चले गए थे।

संयोग ऐसा था कि घर से अर्जुन 20 अप्रैल को निकले और 20 मई को उनके शहीद होने की खबर घर वालों को मिली। यहीं नहीं घर में 20 जून को ही बड़े भाई रामाश्रय राजभर की बेटी की शादी थी।  
विज्ञापन

शहीद का शव देख आंखों से बहे फक्र के आंसू

जुबां पर सिर्फ अर्जुन का नाम - फोटो : अमर उजाला
शादियाबाद क्षेत्र के बरईपारा गांव निवासी जवान अर्जुन राजभर के दंतेवाड़ा में नक्सली हमले में शहीद होने की खबर आते ही घर में कोहराम मच गया था। परिवार के साथ ही गांव के लोग लाल की शहादत पर रो पड़े थे।

हर किसी को अर्जुन के अंतिम दर्शन का इंतजार था। देर शाम अर्जुन का शव उसके आवास पर पहुंचा। दर्शन के लिए ग्रामीणों का सैलाब उमड़ पड़ा। सभी की आंखों से फक्र के आंसू बहने लगे। बेटे का चेहरा देखने के लिए माता-पिता व्याकुल थे। 

बेटे की शहादत की खबर आने के बाद मां रमावती देवी, पिता बलिराम राजभर, छोटे भाई रामकेश के साथ परिवार के अन्य सदस्यों की आंखों आंखें छलक गईं। अर्जुन के शहादत की खबर जिस भी ग्रामीण को मिली, उसके पांव उसके दरवाजे के लिए बढ़ गए।

मां रमावती देवी और पिता बलिराम बेटे की शहादत पर फक्र करते हुए उसके अंतिम दर्शन के लिए व्याकुल हो उठे। सुबह का सूरज निकलते ही शहीद के दरवाजे में काफी संख्या में लोग पहुंच गए और देश के लिए अपने प्राणों को न्यौछावर करने वाले गांव के जांबाज लाल का शव आने का इंतजार करने लगे।

जैसे-जैसे दिन ढलता गया, वैसे-वैसे शहीद के अंतिम दर्शन के लिए लोगों की बेचैनी भी बढ़ती गई। देर शाम करीब सात बजे सैकड़ों के समूह में अर्जुन का शव घर पर पहुंचा।

शव पहुंचते ही बूढ़ी मां रमावती देवी और पिता बलिराम की आंखें बेटे को देखने के लिए परेशान रहीं। लाल का चेहरा देखते ही माता-पिता सहित परिवार के अन्य लोगों की आंखों से आंसुओं की धार बहने लगी। 
 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें