उद्यान में करीब 35 फीट ऊंची मीनार पर महात्मा गांधी की मूर्ति स्थापित है। उद्यान में भगवती चरण बोहरा, रामप्रसाद बिस्मिल, सुभाष चंद्र बोस, अशफाक उल्ला खां, भीखा जी रुस्तम, केआर कामा, बाबू कुंवर सिंह, रामचंद्र पांडुरंग, तात्या टोपे, योगिराज अरविंद, राजेंद्र नाथ लाहड़ी के अलावा उद्यान के संस्थापक बटुकनाथ की मूर्ति स्थापित है। बीच में भारत माता की रक्षा में हीद हुए ज्ञात-अज्ञात अमर बलिदानियों की याद में शहीद स्तंभ भी स्थापित है।
शहीद उद्यान देशभक्तों के लिए तीर्थ स्थल बना हुआ है। यहां आते ही क्रांतिकारियों के त्याग और बलिदान का हुआ बोध राष्ट्रभक्ति का जज्बा पैदा करता है। भारत की आजादी की ललक लेकर खुद की कुर्बानी देने वाले सपूतों की तमन्ना थी, दर्रो-दीवार पर हसरत से नजर करते हैं, खुश रहो अहले वतन अब हम तो सफर करते हैं। मातृभूमि पर प्राणों को न्योछावर करने वाले शहीदों के बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता। इस स्मारक को देखने दूर-दूर से लोग आते हैं।