आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि शुक्र तारा उदय होने के बाद अब वैवाहिक कार्यक्रम और मांगलिक कार्य शुरू हो गए हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शादी के शुभ योग के लिए बृहस्पति, शुक्र और सूर्य का शुभ स्थान पर विराजमान होना जरूरी है।
मांगलिक कार्यों पर लगा विराम शुक्र उदय के साथ ही हट गया। शुक्रवार से अब शहनाई की गूंज के साथ ही मंगल गीत भी गूंजने लगे हैं। नवंबर और दिसंबर में विवाह के शुभ मुहूर्त की संख्या 13 है। अगले साल 2023 में जनवरी से लेकर मार्च तक विवाह के मुहूर्त मिल रहे हैं। 16 दिसंबर से धनु राशि में सूर्य के प्रवेश के बाद विवाह पर रोक लग जाएगी।
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आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि शुक्र तारा उदय होने के बाद अब वैवाहिक कार्यक्रम और मांगलिक कार्य शुरू हो गए हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शादी के शुभ योग के लिए बृहस्पति, शुक्र और सूर्य का शुभ स्थान पर विराजमान होना जरूरी है। रवि गुरु का संयोग सिद्धिदायक और शुभ फलदायी होते हैं। विवाह के मुहूर्त 25 नवंबर से आरंभ हो गए हैं।