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ये है बिचौलियों की सब्जी मंडी: बीएचयू अस्पताल में दवा-जांच-इलाज-एम्बुलेंस और आईसीयू की सबसे सस्ती सेल..

Fri, 27 Oct 2023 09:02 AM IST
किरन रौतेला रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला, वाराणसी

सार

अस्पताल परिसर में प्रवेश द्वार से लेकर ओपीडी, जांच केंद्र, इमरजेंसी तक हर जगह चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। सबके पास वायरलेस सेट भी है। सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं। इसके बाद भी बिचौलियों के इस खेल पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। अस्पताल परिसर में नेत्र रोग विभाग के पास बाहर जाने का छोटा गेट है।
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बीएचयू अस्पताल की इमरजेंसी के गेट के बाहर यही पर बैठे रहते हैं बिचौलिया - फोटो : संवाद
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विस्तार
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भैया, दवा लेना है? सस्ती दिला देंगे? 40 परसेंट कम करा देंगे? जांच तो नहीं कराना? बाहर कराइए जल्दी रिपोर्ट मिल जाएगी, इंतजार नहीं करना पड़ेगा? आईसीयू नहीं मिल रहा है? चलिए बाहर एक अस्पताल है? एम्बुलेंस चहिए? हां मिल जाएगा। वो भी मिल जाएगा... सब मिल जाएगा।

बीएचयू अस्पताल न हुआ बिचौलियों की सब्जी मंडी हो गई। जहां दवा, जांच, एंबुलेंस से लेकर इलाज की भूलभुलैया कमीशन खोरों और दलालों के बीच ऐसी उलझी है कि आम गरीब बौरा जाता है। जिस अस्पताल में कई किलोमीटर सफर तय कर मरीज और उनके परिजन अच्छे इलाज के लिए पूर्वांचल का एम्स समझ कर आते हैं, वहां वो दलालों के मकड़जाल में ऐसे फंस जाते हैं कि पल्लू में बांधकर रखी गाढ़ी कमाई, बेचे हुए खेत-जमीन के पैसे और कर्ज तक लुटा देते हैं। और तो और दलालों के मकड़जाल में फंसने के बाद उन्हें सही इलाज भी नहीं मिलता।

बीएचयू अस्पताल में केवल वाराणसी ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों के साथ ही गोरखपुर, देवरिया, महराजगंज, बस्ती सहित कई जिलों के मरीज इलाज के लिए आते हैं। नेपाल, बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश से भी हर दिन मरीज बीएचयू का रुख करते हैं। यहां ओपीडी के साथ इमरजेंसी में भी मरीजों की भीड़ होती है। इन सबके बीच दलाल भी यहां खूब सक्रिय रहते हैं। मरीजों को जल्दी और सस्ते इलाज का लॉलीपॉप देकर उन्हें प्राइवेट अस्पताल ले जाते हैं और उनकी गाढ़ी कमाई लूट लेते हैं।

बीएचयू अस्पताल परिसर में हैं जांच, इलाज, दवा की सुविधा

बीएचयू अस्पताल और सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक में चलने वाली अलग-अलग विभागों की ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने के बाद मरीज को जांच लिखी जाती है। बीएचयू अस्पताल परिसर में ही जांच, इलाज और दवा खरीदने की पूरी व्यवस्था है। उमंग फार्मेसी, अमृत फार्मेसी के बाद कुछ दिन पहले ही सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक के पास जन औषधि केंद्र भी खुल गया है। यहां मरीजों को बाजार से कुछ कम रेट पर दवाएं मिलती हैं। इसके बावजूद मरीज व परिजन बिचौलियों के चक्कर में फंसकर दवा और जांच के लिए बाहर चले जाते हैं। बिचौलिए अस्पताल परिसर में इस कदर हावी हैं कि वह मरीजों को अपने मकड़जाल में फंसाने में कामयाब भी हो जाते हैं। मरीजों को बीएचयू दवा खरीदने में ज्यादा छूट, बीएचयू की तुलना में कम समय में जांच रिपोर्ट दिलवाने की लालच में बाहर जांच केंद्र पर सैंपल ले जाने तक का खेल धड़ल्ले से चल रहा है।

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बीएचयू अस्पताल: इमरजेंसी से मरीजों को निजी अस्पताल खींच ले जाते हैं बिचौलिए - फोटो : अमर उजाला
चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाकर्मी और सीसी कैमरा, फिर भी अंकुश नहीं

अस्पताल परिसर में प्रवेश द्वार से लेकर ओपीडी, जांच केंद्र, इमरजेंसी तक हर जगह चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। सबके पास वायरलेस सेट भी है। सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं। इसके बाद भी बिचौलियों के इस खेल पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। अस्पताल परिसर में नेत्र रोग विभाग के पास बाहर जाने का छोटा गेट है। यहां बिचौलिए जगह-जगह खड़े रहते हैं। जिन मरीजों को इमरजेंसी में आईसीयू लिखा जाता है और उन्हें बीएचयू में आईसीयू के खाली न होने की जानकारी मिलती है तो बिचौलिए ऐसे लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें लंका, सामनेघाट, भिखारीपुर, ककरमत्ता सहित अन्य निजी अस्पतालों में आईसीयू में बेड दिलाने और बेहतर इलाज का दावा करके ले जाते हैं। जान बचाने की मजबूरी में लोग उनके झांसे में आ भी जाते है।

हाथ में ओपीडी का पर्चा देख बिचौलिए हो जाते हैं सक्रिय

ओपीडी के बाहर सुबह से शाम तक बिचौलिए आपको जगह-जगह खड़े नजर आ जाएंगे। मरीज के हाथ में ओपीडी का पर्चा देखते ही बिचौलिए सक्रिय हो जाते हैं। उनके पीछे-पीछे लग जाते हैं। बाहर मेडिकल की दुकान पर दवा लेने पर 30 से 40 प्रतिशत तक छूट दिलाने की बात कहकर मरीजों को साथ लेकर बाहर मेडिकल की दुकान तक ले जाते हैं। दवा दिलवाते हैं, इसके बाद मरीज को छोड़ देते हैं। इसके पीछे संबंधित व्यक्ति को दवा की दुकान से एक निश्चित कमीशन भी मिलता है।

अस्पताल की ओपीडी से लेकर इमरजेंसी और परिसर में पहले की तुलना में निगरानी बढ़ा दी गई है। बिचौलियों को चिह्नित कर उनकी फोटोग्राफी करवाने, पुलिस को सौंपने की कार्रवाई की जा रही है। विशेष अभियान चलाकर ऐसे लोगों को पकड़ा जाएगा। सुरक्षा में लगे सभी लोगों को इसके लिए अलर्ट किया गया है। - प्रो. शिवप्रकाश सिंह, चीफ प्रॉक्टर, बीएचयू

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