वाराणसी। एक लाख रुपये से अधिक के सोना-चांदी की खरीदारी पर ग्राहकों के लिए पैन कार्ड की अनिवार्यता के विरोध में शुक्रवार को सराफा कारोबारियों के बंद का असर मिला-जुला रहा। थोक मंडी सुड़िया, ठठेरी बाजार की आधी दुकानें बंद रहीं तो आधे से अधिक प्रतिष्ठानों के कारोबारी आम दिनों की तरह अपने व्यवसाय में व्यस्त रहे।
जिन कारोबारियों ने अपनी दूकानें बंद रखी थीं, दोपहर में पीएम के संसदीय कार्यालय में ज्ञापन सौंपने के बाद वे भी अपने-अपने प्रतिष्ठान के शटर उठाकर कारोबार में जुट गए। लिहाजा बंद का असर व्यापक नहीं दिखा।
उत्तर प्रदेश सराफा एसोसिएशन के बंदी के आह्वान पर सुबह 11 बजे सुड़िया में बड़ी संख्या में सराफा व्यापारी एकत्र और केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए। कारोबारियों का कहना था कि यह नियम कतई नहीं लागू होने देंगे, भले आंदोलन करना पड़े।
नारेबाजी करते हुए कारोबारी रवींद्रपुरी स्थित प्रधानमंत्री के संसदीय कार्यालय पहुंचे और ज्ञापन सौंपा। इसके बाद अपने कारोबार में जुट गए। इसके चलते बंद का व्यापक असर मंडियों में नहीं दिखा। थोक मंडी सुड़िया व ठठेरी बाजार की करीब 50 फीसद से अधिक दूकानें खुली थीं।
अपराह्न दो बजे के बाद जो प्रतिष्ठान बंद थे, वह भी खुल गए। रेशम कटरा, गोविंदपुर, नारियल बाजार व छत्तातले में बंदी का कोई असर नहीं दिखा। शहर के ब्रांडेड शोरूम से लेकर कोदई चौकी की सराफा की दूकानें आम दिनों की तरह खुली रहीं।
कारोबारियों ने कहा कि एक लाख रुपए से अधिक के सोना-चांदी की खरीदारी पर ग्राहकों के लिए पैन कार्ड अनिवार्य कर देने से थोक कारोबार पर असर नहीं पड़ेगा। थोक कारोबारियों को सेल इन्वायस की जगह टैक्स इन्वायस देना होता है। प्रदर्शन में सतनाम सिंह धुन्ना, प्रभुशंकर सेठ, प्रद्युमभन अग्रवाल, नारायण दास सराफ, राजू अग्रवाल, अशोक अग्रवाल, देवकांत वर्मा, रवि सराफ आदि शामिल थे।