दोनों पक्षों के बीच विवाद का आपसी सहमति से समाधान नहीं हो सका। इसके बाद विवाह विच्छेद की याचिका अधिवक्ता लक्ष्मण प्रसाद शास्त्री के माध्यम से परिवार न्यायालय में प्रस्तुत की गई। अदालत में मामले की सुनवाई हुई। दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से चले आ रहे वैवाहिक संबंध और विवाद से जुड़े पहलुओं पर विचार के बाद न्यायालय ने विवाह विच्छेद का आदेश पारित किया।
अदालत ने अपने आदेश में पत्नी को एक करोड़ रुपये भरण-पोषण राशि देने का भी निर्देश दिया। इस तरह करीब 22 साल पुराने वैवाहिक संबंध का कानूनी रूप से अंत हो गया। मामले में आर्थिक विवाद और भरण-पोषण की राशि प्रमुख पहलुओं के रूप में सामने आए।
परिवार न्यायालय के इस आदेश के बाद करीब 10 करोड़ रुपये की राशि और कारोबारी हिस्सेदारी से जुड़े विवाद की चर्चा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में संबंधित पक्षों की पहचान, भरण-पोषण राशि के भुगतान की शर्तों और कारोबारी संपत्तियों के बंटवारे के संबंध में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।