बच्चा की बेटी मौजूदा समय में नई दिल्ली में रह कर परास्नातक की पढ़ाई कर रही है और बेटा पटना में स्नातक की पढ़ाई कर रहा है। बच्चा की पत्नी हीरामणि को उसके साथ मुजफ्फरपुर जिले की पुलिस ने वर्ष 2014 में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। बच्चा प्रसाद 2008-09 में भाकपा (माओवादी) की उत्तर प्रदेश की स्टेट आर्गनाइजिंग कमेटी का प्रभारी था।
2010 में बच्चा को कानपुर से उसके आठ साथियों के साथ गिरफ्तार किया गया था। वर्ष 2016 में बच्चा जमानत पर बाहर आया। वर्ष 2018 में बिहार पुलिस ने एक नक्सली घटना के संबंध में बच्चा को गिरफ्तार किया। जमानत मिली तो वह भूमिगत हो गया और ठिकाने बदलते हुए पत्नी के साथ बीएचयू में पढ़ने वाली बेटी के पास चला आया।
भाकपा (एम) के 13 महत्वपूर्ण सदस्यों में से एक
एटीएस के अधिकारियों के अनुसार, भाकपा (माओवादी) के पोलित ब्यूरो के देश भर में 13 सदस्य हैं, उनमें से एक बच्चा है। बच्चा की मुख्य जिम्मेदारी नक्सली साहित्य तैयार करने के साथ ही संगठन से नवयुवकों को जोड़ने की थी।
इसके साथ ही नक्सली गतिविधियों को अंजाम देने के लिए विस्फोटक सामग्री कहां से आसानी से मिलेगी और किस मार्ग से आना-जाना ठीक रहेगा, संगठन के लोगों को यह बताना भी बच्चा की ही जिम्मेदारी थी। बच्चा अपने संगठन के चुनिंदा लोगों से पत्राचार के माध्यम से संदेशों का आदान-प्रदान करता था और बिहार व झारखंड में आयोजित गुप्त बैठकों में शामिल होता था।
होता किरायेदारों का सत्यापन तो सच्चाई आ जाती सामने
प्रत्येक थाने की पुलिस की यह जिम्मेदारी है कि वह अपने क्षेत्र में रहने वाले किरायेदारों का सत्यापन करे। हालांकि पुलिस ऐसा कभी करती नहीं है। इस वजह से कोई कहीं भी आसानी से फर्जी आईडी के आधार पर किराये पर कमरा लेकर रहने लगता है। मकान मालिक भी इस संबंध में गंभीरता नहीं बरतते हैं और मुंहमांगा किराया मिलने पर किसी को भी कमरा देने को आसानी से तैयार हो जाते हैं।
बच्चा के मामले में स्थानीय अभिसूचना इकाई भी एक बार फिर फिसड्डी साबित हुई और उसे माओवादी के रहने की भनक तक नहीं लगी। इससे पहले भी पुलिस और स्थानीय अभिसूचना इकाई की इस तरह की लापरवाही जिले में उजागर हो चुकी है।
बीते जनवरी महीने में चंदौली से गिरफ्तार आईएसआई एजेंट राशिद ने लंका थाना के छित्तूपुर क्षेत्र के पते के सहारे पुलिस और एलआईयू के कर्मचारियों की मिलीभगत से अपना पासपोर्ट बनवाया था। इसके बाद अफगानिस्तान निवासी एक युवक आजमगढ़ के फर्जी पते के सहारे भेलूपुर स्थित क्षेत्रीय पासपोर्ट केंद्र से अपना पासपोर्ट बनवाने में सफल रहा था।