बिहार के सारण जिला के तिलकार गांव निवासी बच्चा प्रसाद उर्फ बलराम जी उर्फ अरविंद मुजफ्फरपुर जिले में नक्सली गतिविधियों में संलिप्तता के आरोप में 2016-2017 में दर्ज दो मुकदमे में वांछित था। बच्चा प्रसाद के अनुसार उसने 1978 में सीपीआई (एमएल) ज्वाइन किया। संगठन की बैठकों में मिलने वाली हीरामणि उर्फ आशा से उसने 1992 में विवाह किया।
एक बेटी दिल्ली में पत्रकारिता की पढ़ाई करती है और बेटा पीएचडी कर रहा है। बच्चा ने एटीएस को बताया कि वह वर्ष 1982 से जेल आ-जा रहा है। वर्ष 2016 में जेल से जमानत पर छूटने के बाद पांच माह तक वह भीषण बीमारी की चपेट में रहा और बीएचयू अस्पताल से उपचार कराया। इस दौरान संगठन के किसी व्यक्ति ने उससे संपर्क नहीं किया।
इसी बीच वह तय किया कि अब ऐसा लोकतांत्रिक संगठन बनाएगा जो भारतीय संविधान और कानून के दायरे में रह कर व्यवस्था परिवर्तन की वकालत करेगा। साथ ही जन आंदोलनों को निःस्वार्थ भाव से समर्थन करेगा। स्वस्थ हुआ तो तकरीबन डेढ़ साल पहले बीएचयू में पढ़ने वाली बेटी के पास रहने के लिए पत्नी के साथ चला आया।
बनारस में रहने के दौरान ही नया संगठन खड़ा करने के लिए कोलकाता निवासी एक प्रोफेसर और दिल्ली के कुछ लोगों के साथ ही मिर्जापुर, चंदौली, सोनभद्र, कानपुर और बिहार व झारखंड के कुछ पुराने परिचितों के साथ नियमित बैठकें की। नया संगठन मूर्त रूप ले पाता, उससे पहले ही वह गिरफ्तार कर लिया गया।
उधर, एटीएस की वाराणसी इकाई के निरीक्षक शैलेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि बच्चा के खिलाफ आगे की कार्रवाई बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की पुलिस की ओर से की जाएगी। गौरतलब है कि उसे एटीएस ने शुक्रवार की रात लंका थाना के छित्तूपुर क्षेत्र की तारा नगर कॉलोनी से गिरफ्तार किया था।
देश भर में थे दोस्त, अब कौन कहां है पता नहीं
बच्चा के अनुसार 1978 से 2016 तक सक्रियता से काम करने के दौरान देश भर में उसके दोस्त थे। 2004-05 में वह उत्तर प्रदेश में सक्रिय हुआ। उसके दोस्त बिहार, झारखंड, मिर्जापुर, सोनभद्र, बलिया, महाराजगंज, कानपुर, विशाखापत्तनम, छत्तीसगढ़, आंध्रप्रदेश, नई दिल्ली, उत्तराखंड, हरियाणा सहित देश के कई अन्य हिस्सों में थे। मौजूदा समय मे कौन कहां है, इसकी जानकारी उसे नहीं है। बच्चा ने कहा कि अब वह हिंसक विचारधारा वाले किसी दल और उससे जुड़े लोगों के साथ दोबारा जुड़ना भी नहीं चाहता है।