फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

माओवादी बच्चा का कबूलनामा- हिंसक अभियान अब संभव नहीं, बनाना चाहता हूं लोकतांत्रिक संगठन

Sun, 08 Mar 2020 12:15 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी पुष्पेन्द्र कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी
विज्ञापन
बच्चा प्रसाद - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के पोलित ब्यूरो के सदस्य बच्चा प्रसाद को देर से ही सही लेकिन यह बात समझ में आ गई है कि हिंसक आंदोलन देश में संभव नहीं है। उससे कुछ हासिल भी नहीं हो सकता है। इसलिए वह वाराणसी में रहकर एक नया लोकतांत्रिक संगठन खड़ा करना चाहता था। इसके मद्देनजर वह देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, आरटीआई एक्टिविस्ट और अन्य प्रबुद्ध लोगों के नियमित संपर्क में था।

विज्ञापन


हथियारबंद नक्सल आंदोलन के नेता चारू मजूमदार से प्रभावित रहे बच्चा ने एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (एटीएस) की वाराणसी इकाई की घंटों की पूछताछ में अपने बारे में बेबाकी से जानकारी दी। बच्चा को शनिवार को बिहार पुलिस को सौंप दिया गया है। बच्चा प्रसाद के अनुसार उत्तर भारत में सैनिक अभियान या इससे मिलते-जुलते हिंसक आंदोलन अब संभव नहीं हैं।

1978 में सीपीआई (एमएल) से जुड़ने वाले बच्चा ने कहा कि वर्ष 2016 में जेल से जमानत पर छूटने के बाद उसने प्रतिबंधित नक्सली संगठन सीपीआई (माओवादी) से दूरी बना ली थी। मौजूदा समय में सीपीआई (माओवादी) दो धड़े में बट गई है। एक धड़ा माओवादी विचारधारा पर ही चलना चाहता है तो दूसरा धड़ा जन आंदोलन के सहारे व्यवस्था परिवर्तन की बात करता है।
विज्ञापन

 

custody - फोटो : Facebook
बिहार के सारण जिला के तिलकार गांव निवासी बच्चा प्रसाद उर्फ बलराम जी उर्फ अरविंद मुजफ्फरपुर जिले में नक्सली गतिविधियों में संलिप्तता के आरोप में 2016-2017 में दर्ज दो मुकदमे में वांछित था। बच्चा प्रसाद के अनुसार उसने 1978 में सीपीआई (एमएल) ज्वाइन किया। संगठन की बैठकों में मिलने वाली हीरामणि उर्फ आशा से उसने 1992 में विवाह किया।

एक बेटी दिल्ली में पत्रकारिता की पढ़ाई करती है और बेटा पीएचडी कर रहा है। बच्चा ने एटीएस को बताया कि वह वर्ष 1982 से जेल आ-जा रहा है। वर्ष 2016 में जेल से जमानत पर छूटने के बाद पांच माह तक वह भीषण बीमारी की चपेट में रहा और बीएचयू अस्पताल से उपचार कराया। इस दौरान संगठन के किसी व्यक्ति ने उससे संपर्क नहीं किया।

इसी बीच वह तय किया कि अब ऐसा लोकतांत्रिक संगठन बनाएगा जो भारतीय संविधान और कानून के दायरे में रह कर व्यवस्था परिवर्तन की वकालत करेगा। साथ ही जन आंदोलनों को निःस्वार्थ भाव से समर्थन करेगा। स्वस्थ हुआ तो तकरीबन डेढ़ साल पहले बीएचयू में पढ़ने वाली बेटी के पास रहने के लिए पत्नी के साथ चला आया।
 
विज्ञापन

maoist
बनारस में रहने के दौरान ही नया संगठन खड़ा करने के लिए कोलकाता निवासी एक प्रोफेसर और दिल्ली के कुछ लोगों के साथ ही मिर्जापुर, चंदौली, सोनभद्र, कानपुर और बिहार व झारखंड के कुछ पुराने परिचितों के साथ नियमित बैठकें की। नया संगठन मूर्त रूप ले पाता, उससे पहले ही वह गिरफ्तार कर लिया गया।

उधर, एटीएस की वाराणसी इकाई के निरीक्षक शैलेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि बच्चा के खिलाफ आगे की कार्रवाई बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की पुलिस की ओर से की जाएगी। गौरतलब है कि उसे एटीएस ने शुक्रवार की रात लंका थाना के छित्तूपुर क्षेत्र की तारा नगर कॉलोनी से गिरफ्तार किया था।

देश भर में थे दोस्त, अब कौन कहां है पता नहीं

बच्चा के अनुसार 1978 से 2016 तक सक्रियता से काम करने के दौरान देश भर में उसके दोस्त थे। 2004-05 में वह उत्तर प्रदेश में सक्रिय हुआ। उसके दोस्त बिहार, झारखंड, मिर्जापुर, सोनभद्र, बलिया, महाराजगंज, कानपुर, विशाखापत्तनम, छत्तीसगढ़, आंध्रप्रदेश, नई दिल्ली, उत्तराखंड, हरियाणा सहित देश के कई अन्य हिस्सों में थे। मौजूदा समय मे कौन कहां है, इसकी जानकारी उसे नहीं है। बच्चा ने कहा कि अब वह हिंसक विचारधारा वाले किसी दल और उससे जुड़े लोगों के साथ दोबारा जुड़ना भी नहीं चाहता है।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें