गंगा, गोमती और वरुणा के जलस्तर में लगातार उफान के चलते बाढ़ पीड़ित गांवों में दुश्वारियां बढ़ती ही जा रही हैं। साथ ही बुधवार को कई और गांवों में बाढ़ का पानी घुसने से लोग सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन करने लगे हैं। चौबेपुर और रोहनिया क्षेत्र डेढ़ दर्जन अधिक गांवों में पानी घुस गया है। वहीं, करसड़ा में चितईपुर-अदलपुरा मार्ग डूब गया। खतरे को देखते हुए एसडीएम ने इस मार्ग पर आवागमन प्रतिबंधित कर दिया है।
चौबेपुर संवाददाता के अनुसार गंगा में बाढ़ से बुधवार को शिवदशा गांव में घुसने से अफरातफरी मच गइ। परनापुर, बर्थरा कला मार्ग डूब जाने से गांव का संपर्क टूट गया है। घरों में पानी घुसने के साथ ही सैकड़ों एकड़ फसल डूब गई है। सरसौल, लुठा, परनापुर, मुरीदपुर, गौरा उपरवार, चंद्रावती, रामपुर, ढकवा और कैथी आदि गाँवों में भी पानी घुस गया है। गौराउपरवार स्थित मौनी बाबा आश्रम, मल्लाह, यादव और हरिजन बस्ती में पानी हिलोरें मारने लगा है।
चिरकिटहवा नार से बाढ का पानी बहरामपुर गांव में भी पहुंच गया है। वहीं नाद और गोमती के बाढ़ से घिरे पिपरी गांव में डीएम के निर्देश पर राहत कार्य में कुछ तेजी आई है। बुधवार को पुलिस के कहने पर गांव के 200 लोग हरिहरपुर, मठिया गांव में पहुंचकर शरण ली। वहीं, गोमती में उफान से अजांव, बर्थरा खुर्द, गरथौली, मठिया, भगवानपुर, कुर्सिया, टेकुरी, लक्ष्मीसेनपुर और राजवारी गांव में पानी घुस चुका है।
रोहनिया संवाददाता के अनुसार गंगा के बाढ़ का पानी बुधवार को करसड़ा में चितईपुर-अदलपुरा मार्ग डूब गया। बाढ़ पीड़ितों का हाल जानने पहुंचे एसडीएम राजातालाब त्रिभुवन राम खतरे को देखते हुए इस मार्ग पर यातायात पर रोक लगा दी। साथ ही उन्होंने शांहशापुर, तिलंगा, जमुनी, मरुई, सिहोरवा, करसड़ा, बेटावर, माधोपुर और छितौनी कोट गांव में बाढ़ पीड़ितों में राहत सामग्री का वितरण कराया।