- केस-3: अक्तूबर 2015 में हुकुलगंज निवासी पान के थोक व्यवसायी ने सूदखोरों से आजिज आकर राजघाट पुल से गंगा में छलांग लगा कर जान दे दी थी। आत्महत्या से पहले अपने करीबियों से व्यापारी का यही कहना था कि मूलधन कबका खत्म हो गया, लेकिन सूदखोर को ब्याज देकर और आए दिन उससे अपमानित होकर वह आजिज आ गया है। इस वजह से अब उसके सामने मौत के अलावा कोई अन्य दूसरा विकल्प नहीं है।
जिले में यह लोग आसानी से बनते हैं सूदखोरों के शिकार
जिले में नगर निगम व जिला पंचायत के सफाई कर्मी, बीएचयू, डीरेका व रेलवे के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और ठेला-पटरी दुकानदार सूदखोरों के आसानी से शिकार बन जाते हैं। सूदखोर सरकारी कर्मियों की पासबुक अपने पास रखते हैं और हर माह तनख्वाह मिलने वाले दिन बैंक के सामने जाकर खड़े हो जाते हैं। तनख्वाह लेकर कर्मचारी जैसे ही बैंक से बाहर निकलता है वैसे ही सूदखोर ब्याज और महीने की किश्त का पैसा जबरन उससे ले लेते हैं। इसके अलावा जो ठेला-पटरी दुकानदार या अन्य प्रकार के जरूरतमंद रहते हैं, उनके जमीन और मकान के कागज गिरवी रखकर ब्याज पर पैसा सूदखोर देते हैं। सूद की दो से तीन किश्त न देने पर सूदखोर मकान या जमीन का रजिस्टर्ड सट्टा करने का दबाव उधार लेने वाले बनाने लगते हैं। इसके बाद उधार लेने वाले पर ऐसा मानसिक और सामाजिक दबाव बनाते हैं कि वह सूदखोर को अपनी जमीन या मकान रजिस्ट्री करने के लिए विवश हो जाता है।
कुछ इस तरह से फंस जाते हैं लोग सूदखोरों के जाल में
सूदखोरों के जाल में आमजन के लोगों के फंसने की एक बड़ी वजह उनकी अज्ञानता और बैंकों की तमाम तरह की कागजी लिखापढ़ी की कवायद से बचना है। लंका में चाय की दुकान संचालित करने वाले बुजुर्ग दुकानदार ने शुक्रवार को बातचीत के दौरान बताया कि पिछले साल लॉकडाउन लगा तो चार माह के लिए गांव गए थे। वापस आए तो पैसा नहीं था। बैंक में कर्ज लेने जाते तो 72 तरह के कागज मांगे जाते और वह सब हम परदेश में भला कहां से दे पाते। ऐसे में पड़ोस के परिचित दुकानदार की मदद से 10 रुपये सैकड़ा की दर पर पांच हजार रुपये लिए। कुछ ऐसा ही हाल अन्य जरूरतमंदों का भी रहता है। वह बैंक से उधार लेने की बजाय अपने परिचित सूदखोर से पैसा लेना ज्यादा अच्छा समझते हैं।
आवश्यकता देख कर निर्धारित होती है 10 से 40 % तक ब्याज
ब्याज पर पैसा देते समय सूदखोर उधार लेने वाले की हैसियत और उसकी आवश्यकता देखते हैं। इसके बाद प्रतिमाह 10 से 40 प्रतिशत तक ब्याज दर पर पैसा उधार देते हैं। अब जैसे कि किसी की दुकान या धंधा अच्छा चल रहा है और वह किसी सूदखोर से अपनी किसी आवश्यकता के लिए एक बड़ी रकम कुछ महीनों के लिए उधार मांगता है तो उसकी ब्याज की दर ज्यादा रहेगी। शादी और बीमारी के उपचार आदि का हवाला देकर कोई पैसा उधार मांगता है तो उसके लिए भी ब्याज दर ज्यादा रहती है।
जिले में वर्षों से नहीं चला अभियान
सूदखोरों के खिलाफ जिले में पुलिस और प्रशासन के स्तर से वर्षों से कोई अभियान नहीं चलाया गया है। सूदखोरी से संबंधित कोई बड़ी घटना जब सामने आ जाती है तो पुलिस और प्रशासनिक महकमा थोड़ी सक्रियता दिखाता है। इसके बाद फिर सभी बेफिक्र हो जाते हैं।
रखें इन बातों का ध्यान, रहेंगे सुरक्षित
- प्रयास यही करें कि सूदखोर से ब्याज पर पैसा उधार न लें।
- जरूरत पड़ने पर बैंक से ही पैसा उधार लें। अब बैंकों में कागजों आदि का बहुत ज्यादा तामझाम नहीं रह गया है।
- सूदखोर से पैसा लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है तो ब्याज की दर और समयावधि तय कर लिखा पढ़ी कराएं।
- सूदखोर परेशान करे तो तत्काल नजदीकी थाने या पुलिस अधिकारियों को सूचना दें। इसे लेकर कभी संकोच न करें।
जिले में यदि किसी को भी कोई सूदखोर परेशान कर रहा है तो वह इसकी शिकायत सीधे हमारे कार्यालय में या सीयूजी नंबर पर कर सकते हैं। सूदखोरों के चंगुल में फंसने से हमें खुद बचना चाहिए। ऐसे लोगों के बारे में सूचना अपने नजदीकी थाने या सीओ ऑफिस में भी दी जा सकती है। -अमित पाठक, एसएसपी, वाराणसी