Varanasi News: कश्मीरीगंज के हस्तशिल्पियों ने बताया कि मोटी लकड़ी से सिंधोरा और अन्य सामान अच्छे बनते हैं। हालांकि अब इन्हें प्लाईवुड वाले मुंह मांगे दाम पर ले जा रहे हैं। इस वजह से भी लकड़ी का अभाव बना हुआ है। गोंडा, बहराइच में यूकेलिप्टस की लकड़ी मिल रही है, लेकिन वहां से माल मंगाने में ट्रांसपोर्ट खर्च अधिक आता है।
जीआई उत्पाद में शामिल लकड़ी के खिलौनों के लिए कच्ची लकड़ी नहीं मिल पा रही है। पिछले माह से लकड़ी के खिलौनों के उत्पादन में कमी आई है। लकड़ी न मिलने से खोजवां कश्मीरीगंज के लगभग 600 हस्तशिल्पियों को काफी ऑर्डर छोड़ने पड़ रहे हैं। सिंधोरा, लट्टू समेत अन्य खिलौने बनाने के लिए प्रयागराज, लखनऊ और बरेली से लकड़ी नहीं आ पा रही है।
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भेलूपुर के खोजवां कश्मीरीगंज के युवा हस्तशिल्पी राज कुंदेर ने बताया कि खिलौनों के लिए कोरैया लकड़ी पहले बिहार व चित्रकूट से आती थी, अब सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया है। इस दशा में मजबूरन सभी कारीगरों ने यूकेलिप्टस लकड़ी से सामान बनाना शुरू किया। पहले यह गीली लकड़ी 1500 से 2000 रुपये प्रति क्विंटल मिलती थी, लेकिन अब नहीं मिल पा रही है। वहीं, सूखी लकड़ी 3000 से 4000 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है।
खोजवां कश्मीरीगंज के स्टेट अवॉर्डी गोदावरी सिंह ने बताया कि लकड़ी के अभाव और बढ़ते दाम से खिलौनों के उत्पादन पर असर पड़ा है। मई और जून में लगन नहीं होने के कारण भी सिंधोरा, बॉक्स सामानों का कारोबार मंदा है। कश्मीरीगंज में हर महीने आठ से 10 ट्रक लकड़ी की खपत है।