प्रमुख सियासी दलों के शीर्ष नेतृत्व के बदले मिजाज ने इस बार के विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल के कई नेताओं को सकते में डाल दिया है। सभी दलों में टिकट बंटवारे के बाद सियासी संग्राम चरम पर है। सपा और भाजपा से ने जिन नेताओं को टिकट नहीं दिया है उनके समर्थक खुल कर सामने आ चुके हैं। वाराणसी समेत पूरे पूर्वांचल में रोज प्रदर्शन और अपने नेताओं के समर्थन में नारेबाजी हो रही है।
बगावत की आंच से समूचे पूर्वांचल की राजनीति को गरमाने की तैयारी है। सपा से टिकट कटने के बाद बागी हुए बाहुबली विधायक विजय मिश्र भदोही के अलावा आसपास के कई जिलों के सियासी समीकरण को प्रभावित करने की फिराक में हैं।
अंदरखाने से छनकर आईं खबरों के मुताबिक पूर्वांचल के कई छोटे दलों को दबे पांव एकजुट कर महागठबंधन की शक्ल दी जा रही है।
इस गठबंधन के बैनर तले पूर्वांचल की लगभग दो दर्जन सीटों पर प्रत्याशी उतारने की तैयारी है। शुक्रवार को विधायक विजय मिश्र के धनापुर स्थित आवास पर आयोजित बैठक में विधानसभा क्षेत्र के कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में विधायक को चुनाव लड़ाने की रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया।
कई घंटे तक चली कमेटी की बैठक में लिए गए फैसलों को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
आगामी 30 जनवरी को प्रेस कान्फ्रेंस कर कमेटी विधायक के चुनाव लड़ने की स्थिति को स्पष्ट करेगी। लेकिन सूत्रों की मानें तो भदोही, मिर्जापुर, सोनभद्र, चंदौली, जौनपुर, आजमगढ़ समेत पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में जातिगत आधार पर सक्रिय लगभग एक दर्जन छोटे राजनीतिक दलों को एकजुट कर एक महागठबंधन बनाया जा रहा है।
इस नए गठबंधन के बैनर तले पूर्वांचल की विभिन्न सीटों पर प्रत्याशी उतारे जाएंगे। इससे कई दलों के चुनावी समीकरण पर असर पड़ना तय माना जा रहा है। गौरतलब है कि अखिलेश यादव की दूसरी सूची से नाम कटने के बाद सपा विधायक विजय मिश्र ने बड़ी संख्या में समर्थकों के साथ पार्टी से इस्तीफा दे दिया था।
इसके बाद कई बड़े दलों के टिकट पर उनके चुनाव लड़ने की संभावनाएं भी जिले की सियासी फिजाओं में तैरीं, लेकिन किसी को आधार नहीं मिला। अब देखना दिलचस्प होगा कि विधायक के चुनाव लड़ने की गोपनीय तैयारियों पर 30 जनवरी को क्या खुलासा होता है।