बुजुर्ग मंजू को जरूरी सामान देते अमन कबीर और उनकी मां।
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कुछ समय पहले मंजू दत्त को आंख में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी ने घेर लिया। धीरे-धीरे उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। इलाज के लिए पैसे और देखभाल की जरूरत थी। उन्हें उम्मीद थी कि उनका बेटा इस कठिन समय में उनके साथ खड़ा होगा, परंतु मंजू दत्त की उम्मीदें उस दिन टूट गईं, जब उनके बेटे और बहू ने साफ शब्दों में कह दिया कि वे उनके इलाज का खर्च नहीं उठा सकते। इतना ही नहीं, उन्हें घर छोड़ने के लिए भी कह दिया गया।
यह सुनकर मंजू दत्त की आंखों से आंसू बह निकले। जिस बेटे को उन्होंने अपने खून-पसीने से पाला था, उसी के घर में आज उनके लिए जगह नहीं बची थी। फिर भी उन्होंने अपने बेटे के लिए मन में कोई शिकायत नहीं रखी। भारी मन और भीगी आंखों के साथ उन्होंने बेटे को आशीर्वाद दिया और चुपचाप घर से निकल पड़े।
अब मंजू दत्त मंडलीय अस्पताल में अपना इलाज करा रहे हैं। अस्पताल के बिस्तर पर लेटे हुए उनके चेहरे पर दर्द तो साफ दिखाई देता है, लेकिन बेटे के लिए दुआएं अब भी कम नहीं हुई हैं। वह कहते हैं कि “बेटा खुश रहे, यही मेरे लिए सबसे बड़ी बात है।”
अमन की मां ने जरूरतमंदों में बांटे कपड़े।
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सामाजिक कार्यकर्ता अमन कबीर जब इस होली पर मंजू दत्त से मिले तो उन्होंने अपना दर्द बयां किया। अमन की मां भी मंजू की कहानी सुनकर निराशा हो गईं। अपनी कहानी बताते-बताते मंजू नाराज भी हुए। कहा कि मेरी वीडियो बनाकर वायरल करो, ताकि बेटे को उसकी करनी का पता चले। अमन और उनकी मां ने मंजू को कपड़े दिए। इस पर उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।
जिंदगी भर बेटे के भविष्य को संवारने में लगे मंजू दत्त आज बीमारी और अकेलेपन से जूझ रहे हैं। उनकी आंखों में दर्द के साथ-साथ अब भी एक उम्मीद झलकती है-शायद किसी दिन उनका बेटा उन्हें फिर से गले लगा ले।