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UP: जानलेवा हमले के दोषी को सात साल की सजा, दरोगा के खिलाफ परिवाद दर्ज करने का आदेश; जानें मामले

Sun, 29 Mar 2026 01:42 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: वाराणसी में गोली मारकर हत्या के प्रयास मामले में आरोपी ईश्वर चंद्र यादव को अदालत ने 7 वर्ष कारावास व जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं, आभूषण गबन मामले में अदालत ने दो दरोगाओं के खिलाफ परिवाद दर्ज करने का आदेश दिया, जिन पर जबरन गहने हड़पने और धमकी देने के आरोप हैं।
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Varanasi court - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Varanasi Crime: गोली मारकर हत्या के प्रयास के मामले में दोषी ईश्वर चंद्र यादव को अपर सत्र न्यायाधीश देवकांत शुक्ला की अदालत ने शनिवार को सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। चौबेपुर थाना क्षेत्र में हुए इस मामले में अदालत ने आरोपी पर छह हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। यदि अर्थदंड अदा नहीं किया गया, तो आरोपी को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

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अभियोजन पक्ष के अनुसार, चौबेपुर थाना क्षेत्र के रमना गांव निवासी शिवभजन यादव ने 30 सितंबर 2024 को थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि गांव के ही ईश्वर चंद्र यादव उर्फ ईश्वर यादव ने जान से मारने की नीयत से गोली चला दी। गोली शिवभजन यादव को नहीं लगी, बल्कि उनके पुत्र के पास खड़े तीसरे व्यक्ति परमेश्वर के कंधे में जा लगी, जिससे वह घायल हो गया। घटना के बाद चौबेपुर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की।

विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया। मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश देवकांत शुक्ला की अदालत में चल रही थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने 13 मार्च को फैसला सुरक्षित रख लिया था। शनिवार को अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी ईश्वर चंद्र यादव को दोषी करार देते हुए सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई।

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दरोगा के खिलाफ परिवाद दर्ज करने का आदेश
न्यायालय ने कमिश्नरेट के दो उप-निरीक्षकों के खिलाफ आभूषण गबन मामले में परिवाद दर्ज करने का आदेश दिया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष कुमार की अदालत ने यह कदम पीड़िता सीता चौहान के प्रार्थना पत्र और साक्ष्यों के आधार पर उठाया। जगतगंज निवासी सीता चौहान ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से कोर्ट में गुहार लगाई। 

पीड़िता का आरोप है कि 28 फरवरी 2025 को एक अन्य मामले की जांच के दौरान दरोगा अभिषेक त्रिपाठी और जागृति गिरी ने उन्हें और आराधना नामक महिला को जबरन थाने में रखा। दरोगाओं ने उनके घर वालों को डराया और मां के पुराने पुश्तैनी गहने मंगवा लिए। 

पुलिस ने इन गहनों को चोरी का माल बताया, जबकि पीड़िता के पास चेतमणि ज्वेलर्स के पक्के बिल मौजूद थे। पीड़िता के होने वाले पति सूरज से भी शादी के लिए बनवाए गए गहने जांच के नाम पर छीन लिए गए। आरोप है कि दरोगा अभिषेक त्रिपाठी ने सादे कागजों और सहमति पत्रों पर जबरन हस्ताक्षर करवाए ताकि गहनों को हड़पा जा सके। जेल से छूटने के बाद जब सीता और उनके परिवार ने आभूषण वापस मांगे, तो उन्हें गालियां दी गईं और जान से मारने व दोबारा जेल भेजने की धमकी दी गई। 
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