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दस्तक अभियान से खोजे जाएंगे कुपोषित और टीबी से ग्रसित बच्चे

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संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए चलाए जा रहे दस्तक अभियान में कुपोषण और टीबी ग्रसित बच्चों का ब्योरा जुटाया जा रहा है। इसमें अतिकुपोषित बच्चों की सूची अलग से तैयार कराई जाएगी, ताकि बच्चों का बेहतर इलाज किया जा सके। स्वास्थ्य विभाग की ओर से हर साल 16 जुलाई से 31 जुलाई तक संचारी रोग अभियान चलाया जाता है। अभियान का उद्देश्य लोगों को संचारी रोग से बचाव के प्रति जागरूक करना है।
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इसमें शहरी, ग्रामीण इलाकों में गठित स्वास्थ्य विभाग की टीम लोगों से घर के आसपास साफ सफाई पर ध्यान देने, जल भराव न होने देने की अपील भी कर रही है। वर्तमान में संचारी रोग के साथ ही कुपोषण और टीबी से मुक्ति दिलाने की बड़ी चुनौती है। इसको पूरा करने के उद्देश्य से प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने भी अपने दौरे के समय स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य लोगों से आगे आने का आह्वान किया था। अब स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस चुनौती से निपटने के लिए विशेष रणनीति के तहत काम किया जा रहा है।
दस्तक अभियान में कई विभागों का सहयोग
सीएमओ डॉ. संदीप चौधरी ने बताया कि दस्तक अभियान के तहत डेंगू, मलेरिया के साथ ही टीबी और कुपोषण के संभावित लक्षण वालों को भी चिन्हित किया जा रहा है। आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को जागरूक कर रही हैं। संभावित लक्षण वाले व्यक्तियों को चिन्हित कर रही हैं। अभियान की सफलता के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ ही शिक्षा, आईसीडीएस, ग्राम्य विकास, नगरीय विकास व अन्य विभाग का भी सहयोग लिया जा रहा है।
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छह लाख लोगों की हुई स्क्रीनिंग
सीएमओ ने बताया कि 16 जुलाई से चले दस्तक अभियान में 1,69,918 घरों का भ्रमण कर छह लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की गई। इसमें बुखार के 574 मरीज मिले, लेकिन किसी में भी मलेरिया नहीं पाया गया। इसके साथ ही सर्दी-खांसी (आईएलआई) के 323, क्षय रोग के संभावित लक्षण वाले 46 लोग मिले, जिनका सैंपल जांच के लिए भेजा गया है।
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