हत्यारोपी आलोक निराला नगर में किराये पर कमरा लेकर रहता है। आलोक के साथ मॉल में काम करने वाला और विद्यापीठ का छात्र रोहित सिंह उसका रूम पार्टनर है। वहीं, आरा निवासी दोनों शूटर आलोक के कमरे में ठहरते थे। अब तक की तफ्तीश के अनुसार मॉल के अंदर आलोक फायरिंग करने की नीयत से नहीं बल्कि प्रशांत को समझाने गया था।
चारों ने तय किया था कि अगर प्रशांत उनकी बातें मान जाएगा तो ठीक है नहीं तो उसे बातों में उलझा कर मॉल के बाहर लाएंगे और गोली मार कर बाइक से भाग निकलेंगे। इसी वजह से रोहित बार-बार सभी को समझा कर शांत करा रहा था। बताया जाता है कि उसने अपने शोरूम का सीसी कैमरा भी वारदात से पहले बंद कर दिया था।
पुलिस ने आलोक के बारे में पता लगाना शुरू किया तो सामने आया कि वह मनबढ़ है। विद्यापीठ के छात्रों से मारपीट करना, रुपये छीनना, धमकाना और बेवजह झगड़ा करना उसकी आदत में है। इसी हफ्ते नगर निगम कार्यालय के पीछे के शिवपुरवा क्षेत्र में दो कुत्तों के लगातार भौंकने पर उन्हें आलोक ने गोली मार दी थी।
इसके बाद एक लड़के के कमरे में घुस कर उसकी मार्कशीट छीन ली थी। आलोक को संरक्षण देने वालों में विद्यापीठ छात्रसंघ का एक पूर्व अध्यक्ष, एक पूर्व महामंत्री और प्रयागराज निवासी विद्यापीठ का एक छात्रनेता बताया गया है।
मॉल में फायरिंग के मुख्य आरोपी आलोक उपाध्याय के मनबढ़ होने के पीछे सिगरा पुलिस की हद दर्जे की लापरवाही भी बड़ी वजह है। आलोक के खिलाफ मारपीट, बलवा, धमकाने सहित अन्य आरोपों में सिगरा थाने में चार मुकदमे दर्ज हैं। इसके बावजूद सिगरा पुलिस आलोक के प्रति कभी सख्त नहीं हुई और उसका मन बढ़ता चला गया।
काशी विद्यापीठ के एक छात्र ने बताया कि आलोक ने उसकी तीन बार पिटाई की। हर बार आलोक की शिकायत सिगरा थाने पर की गई और उसे पकड़वाया गया लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की और समझाबुझाकर छोड़ दिया।
ऐसे ही कई अन्य छात्रों के साथ भी आलोक ने मारपीट की लेकिन पुलिस का उसके प्रति शिथिल रवैया बरकरार रहा और उसकी मनमानी जारी रही। दुकानों से सामान लेकर बगैर पैसा दिए भाग जाना और अवैध असलहा खोंस कर चलना आलोक की आदत में शुमार है। इतनी मनमानी के बावजूद आलोक को पुलिस संरक्षण का मिलना सभी की समझ से परे है।