Varanasi News: शुभारंभ मुख्य अतिथि पंडित राजेश्वर आचार्य ने दीप जलाकर किया। दीप के प्रकाश के साथ ही शास्त्रीय परंपराओं की सुमधुर ध्वनियां भी सभागार में फैलने लगीं। संध्या समय शुरू हुए कार्यक्रम में एकेडमी के छात्रों ने महान गायिकाओं के प्रति श्रद्धासुमन अर्पित किए।
नागरी नाटक मंडली का मंच मालिनी के सुरों और अवंतिका के तबले की थाप का गवाह बन गया। शास्त्रीय संगीत की विभूतियों विदुषी सविता देवी और ठुमरी साम्राज्ञी सिद्धेश्वरी देवी के सम्मान में आयोजित दो दिवसीय संगीत श्रद्धांजलि के अंतिम दिन शिष्यों व कलाकारों ने सुर और संगीत की स्वरांजलि अर्पित की।
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रविवार को सिद्धदेश्वरी देवी एकेडमी ऑफ इंडिया म्यूजिक की ओर से आयोजित दो दिवसीय संगीत समारोह की अंतिम निशा मालिनी के सुरों के नाम रही। मालिनी अवस्थी ने अपने चिरपरितच अंदाज में सुरों की सुमधुर बरसात की। उन्होंने ऐ साची कहो मोसे बतियां हो...की मनमोहक प्रस्तुति दी। उनके साथ हारमोनियम पर पं. धर्मनाथ मिश्र, तबले पर शुभ महाराज और सारंगी पर विनायक सहाय ने संगत की।
इसके पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि पंडित राजेश्वर आचार्य ने दीप जलाकर किया। दीप के प्रकाश के साथ ही शास्त्रीय परंपराओं की सुमधुर ध्वनियां भी सभागार में फैलने लगीं। संध्या समय शुरू हुए कार्यक्रम में एकेडमी के छात्रों ने महान गायिकाओं के प्रति श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसके बाद विदुषी सविता देवी के जीवन पर आधारित एक फिल्म भी प्रदर्शित की गई।
इसमें हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की दुनिया में उनके योगदान को याद किया गया। इसके बाद मंच पर अवंतिका महाराज ने तबले पर एकल प्रस्तुति से समां बांधा।
विशिष्ट अतिथि पंडित साजन मिश्र, डॉ. अजीत सहगल, सुधा दत्ता और पंडित पूरन महाराज मौजूद थे।