वाराणसी। गायिका मालिनी अवस्थी मंगलवार को बीएचयू के भोजपुरी अध्ययन केंद्र देखने के बाद कहा कि यहां आकर ऐसा लग रहा है जैसे कि गांव की आत्मा से मेरा मिलन हो गया।
लोककला संग्रहालय में रखे कजरौटा, सरौना, पानदान, बेना, खटपटी, कमलदानी, झांझ, खटिया, डोकवा जैसे भोजपुरी वाद्य और घरेलू सामानों को देखकर वह इतनी खुश हुईं कि इस थाती को बढ़ाने में सहयोग की पेशकश कर बैठीं।
उन्होंने कहा कि कहा कि बनारस के ऐसे अनेक संग्रहणीय धरोहरों को जुटाया और सहेजा जाना चाहिए।
भोजपुरी माटी से जुड़े लोगों को इस लोक कला संग्रहालय के विस्तार के लिए सहयोग देने की अपील करते हुए कहा कि उन्होंने कहा कि संग्रहालय ऐसा होना चाहिए जहां आकर लोग अपने पूर्वजों की जीवन यात्रा के मंगलदर्शन कर सकें।
उन्होंने पुस्तकालय और राहुल ग्रंथागार का भी अवलोकन किया। इससे पूर्व उनका स्वागत भोजपुरी अध्ययन केंद्र के समन्वयक प्रो. सदानंद शाही और सह समन्वयक प्रो. अवधेश प्रधान ने किया।
इस अवसर पर प्रो. चंपा सिंह, शिखा सिंह, यश्वी मिश्रा, प्रियंका गुप्ता, कुमारी ममता, सम्रता, सर्वेश मिश्रा, दिलीप कुमार, विनोद आदि मौजूद रहे।