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एएसआई को नहीं सौंपा जाएगा विश्वनाथ मंदिर

Wed, 10 Dec 2014 01:48 AM IST
Varanasi
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काशी विश्वनाथ मंदिर को संरक्षण के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को नहीं दिया जाएगा। एएसआई के इस प्रस्ताव को विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद ने खारिज कर दिया है। न्यास का कहना है कि यह मंदिर आस्था का केंद्र है, संरक्षण के लिए एएसआई को देने से श्रद्धालुओं की दिक्कतें बढ़ सकती हैं। पत्थर की दीवारों में सीलन और इनैमल पेंट लगने के कारण इसके कमजोर होने की आशंका जताई गई थी और संरक्षण के लिए एएसआई को पत्र भेजा गया था।
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काशी विश्वनाथ मंदिर की देखभाल का जिम्मा महंत करते थे। ज्योर्तिलिंग के अरघे से सोना चोरी होने के बाद 1983 में इस मंदिर का सरकार ने अधिग्रहण किया था। उसके बाद मंदिर प्रबंधन ने कई बार दीवारों पर इनैमल पेंट करा दिया। पेंट के चलते पत्थरों में क्षरण शुरू हो गया तो इसका विरोध होने लगा। पिछले साल शिखरों पर स्वर्ण पत्तर चढ़ाने की योजना बनाई गई तो पाया गया कि मंदिर के शिखर पेंट के चलते जर्जर हो चुके हैं। छत और दीवारों की क्षमता का आकलन के लिए गठित टीम ने भी इस बात की तस्दीक की तो जिलाधिकारी प्रांजल यादव ने छह महीने पहले मंदिर का रखरखाव एएसआई से कराने की पहल की। प्रशासन के आग्रह पर एएसआई के महानिदेशक डा. बीआर मणि ने पांच महीने पहले आईआईटी बीएचयू, आईआईटी रुड़की के प्रोफेसरों के अलावा पुरातत्वविदों की टीम के साथ मंदिर का निरीक्षण किया था। दो दौर की बैठकों के बाद एएसआई ने मंदिर प्रशासन को पत्र भेजकर कहा कि वह मंदिर का संरक्षण तभी करेगा जब मंदिर उसे हस्तांतरित कर दिया जाए। इस प्रस्ताव को काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद ने निरस्त कर दिया है। अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी पारस नाथ द्विवेदी ने मंगलवार को बताया कि न्यास ने एएसआई को मंदिर सौंपने के प्रस्ताव को जनता की दुश्वारी बढ़ाने वाला माना है। न्यास ने कहा है कि यह मंदिर देश के करोड़ों भक्तों की आस्था का केंद्र है। एएसआई को सौंपे जाने के बाद नियमों की जटिलता का सामना भक्तों को करना पड़ सकता है। ऐसे में दिक्कतें कम होने की बजाए बढ़ जाएंगी। ऐसी स्थिति में मंदिर एएसआई को नहीं सौंपा जा सकता।

कोट्स
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न्यास परिषद का फैसला सर्वोच्च है। एएसआई को मंदिर न सौंपने के उनके निर्णय पर मंदिर प्रशासन किसी तरह का हस्तक्षेप या पुनर्विचार नहीं कर सकता।- अजय कुमार अवस्थी, मुख्य कार्यपालक अधिकारी
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काशी विश्वनाथ मंदिर में मनमाने तरीके से निर्माण हो रहे हैं। ऐसे में उसको अपने पौराणिक स्वरूप में रखने के लिए जरूरी है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण मंदिर को संरक्षित करे। जगन्नाथ मंदिर, कोणार्क का सूर्य मंदिर सहित तमाम मंदिर संरक्षित हैं तो काशी विश्वनाथ मंदिर को संरक्षण में देने में क्या आपत्ति हो सकती है।
- शतरूद्र प्रकाश, वरिष्ठ सपा नेता एवं प्रदेश के पूर्वमंत्री  
इनसेट
इनैमल पेंट हटाने की प्रक्रिया पर सीबीआरआई की रिपोर्ट रुकी
वाराणसी। विश्वनाथ मंदिर की दीवारों पर लगे इनैमल पेंट को हटाने की भी प्रक्रिया शुरू होने में वक्त लग सकता है। इसके लिए सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई) ने रिपोर्ट तैयार करने के एवज में 57 लाख रुपये मांगे हैं। हालांकि न्यास परिषद ने इस रकम को देने की संस्तुति कर दी है लेकिन अभी तक धन नहीं दिया जा सका है। इस कारण रिपोर्ट नहीं मिली है।
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