संकटमोचन संगीत समारोह की पहली निशा पर रात डेढ़ बजे से सूर्योदय तक भोजपुरी, दादरा, चैती, भजन, कथक और सितार वादन जैसे शास्त्रीय संगीत का मेल हुआ। अकरम खां ने तबला बजाया तो 70 साल के पंजाबी कलाकार को पहली बार हनुमान दरबार में सितार बजाने का मौका मिला। आधी रात करीब डेढ़ बजे लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने भोजपुरी, दादरा, चैती और भजन के संग शास्त्रीय संगीत का फ्यूजन सुनाया।
बीच-बीच में श्रोताओं से बातें करते हुए जब भोजपुरी चैती ''सूतल सइयां के जगावे हो रामा तोरी मीठी बोलिया'' पर सुर लगाया तो दूरदराज के श्रोताओं को उनके गांव खेड़े की याद सताने लगी। फिर राग विहाग में ‘लंका जो धाय गयो’, ‘नदिया तू धीरे बहो रे’,‘आओ पिया सूनी पड़ी है सेजिया हमार’ और ‘गंगा रेती पे बंगला छवाय दा मोरे राजा’ सुनाकर मालिनी अवस्थी ने पांचवीं प्रस्तुति का अंत किया। हारमोनियम पर पं.धर्मनाथ मिश्र और तबला पर शुभ महाराज ने संगत की।