देखते ही देखते मंडी परिसर हंगामे के अखाड़े में तब्दील हो गया। संचालक और उसके सहयोगियों ने निगम की टीम को मंडी से हटाने के लिए पूरा जोर लगाया, लेकिन पुलिस बल की मौजूदगी के कारण उनकी एक न चली।
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि यह मंडी सार्वजनिक स्थान पर लगती है और यहां किसी भी निजी व्यक्ति को किसानों से पैसा वसूलने का अधिकार नहीं है। निगम प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में दोबारा वसूली की शिकायत मिली, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।