बीएचयू के एसवीडीवी में डॉ. फिरोज की नियुक्ति के विरोध और देश भर में इसको लेकर प्रतिक्रिया के बीच महामना मदर मोहन मालवीय के पौत्र और बीएचयू के चांसलर न्यायमूर्ति गिरधर मालवीय का बयान आया है। एक वीडियो जारी कर मालवीय ने छात्रों के धरने को गलत बताया है। साथ ही यह भी कहा है कि इस मामले में छात्रों को सही ढंग से समझाने की जरूरत है। अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि अगर आज बीएचयू के संस्थापक महामना पं. मदनमोहन मालवीय होते तो डॉ. फिरोज खान के नाम पर पहले मुहर लगाते।
बीएचयू मीडिया सेल के व्हाटसएप ग्रुप पर न्यायमूर्ति के इस 2.02 मिनट के वीडियो को शेयर भी किया गया है। इसमें मालवीय का कहना है कि छात्र जो कर रहे हैं वह गलत है। ऐसी दशा में उन्हें सही ढंग से समझाने वाला कोई नहीं है।
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एएनआई को दिए अपने बयान में मालवीय ने स्वास्थ्य ठीक न होने की वजह से यात्रा न कर पाने का हवाला देते हुए मालवीय ने अपने बयान में कहा कि अगर स्वास्थ्य ठीक रहता तो वह बीएचयू जरूरत आते। एक मुस्लिम विद्वान का धर्म विज्ञान संकाय में नियुक्ति करना गलत है। क्यों ठीक है, यह भी जानना जरूरी है। चयन समिति ने भी विद्वता को माना है।