पखवारे भर के अंदर भवन निर्माण सामग्रियों की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। बालू-गिट्टी के दाम डेढ़ से दोगुना तक बढ़ गए हैं। इसकी बड़ी वजह अवैध खनन और वसूली पर सख्ती से रोक बताई जा रही है। इससे आम परिवारों के लिए आशियाने का सपना पूरा कर पाना और महंगा हो गया है। हालात तो यह हैं कि जिनको काम कराना ही है उन्हें बढ़े दाम देने
के बाद भी मैटेरियल समय पर नहीं मिल पा रहा।
अवैध खनन पर रोक के बाद गंगा से निकलने वाली सफेद बालू बाजार से लगभग गायब हो गई है। वहीं, बाहर से यहां की मंडियों में आने वाली लाल बालू की आवक भी घट गई है। इसके दाम में डेढ़ से दो हजार रुपये प्रति सौ फीट की दर से उछाल आया है। चार हजार से 5600 रुपये प्रति सौ फीट की दर से बिकने वाली गिट्टी इस समय सात से आठ हजार रुपये तक पहुंच गई है। बिल्डिंग मैटेरियल कारोबारियों का कहना है कि इस समय सरकार के विभिन्न प्रोजेक्ट चल रहे हैं। उनमें निर्माण सामग्रियों की भारी मांग है। इसके चलते दाम में कुछ बढ़ोतरी तो पहले ही हो गई थी, मगर प्रदेश में नई सरकार आने के बाद अवैध खनन बंद होने से गिट्टी-बालू की आवक चौथाई रह गई है। इससे दाम आसमान छूने लगे हैं। ऐसे में आम परिवारों के लिए अपना घर बना पाना अब और मुश्किल हो गया है।
बिल्डिंग मैटेरियल के दाम में आए जबरदस्त उछाल का असर निर्माणाधीन भवनों पर पड़ रहा है। 90 प्रतिशत साइट्स पर काम ठप हो गया है और जहां चल रहा है वहां बेहद कम रफ्तार है। नोटबंदी के बाद फ्लैट्स के सस्ते होने की जो आस जगी थी, वह अब पूरी नहीं हो पाएगी। गिट्टी-बालू और मिट्टी के साथ ही सरिया और सीमेंट के दाम में बढ़ोतरी से भवन निर्माण की लागत बढ़ रही है। इस कारण फ्लैट्स की कीमतें भी बढ़नी तय मानी जा रही है। इसका असर केवल बिल्डर्स पर ही नहीं आम जनता पर भी पड़ेगा। बिल्डर्स की मानें तो वह कंस्ट्रक्शन मैटेरियल में 10 प्रतिशत तक आए उछाल का घाटा ही सह सकते हैं। इस समय दोगुने तक की वृद्धि दर्ज की जा रही है। ऐसे में जहां लोगों को भवन समय से नही दिया जा सकेगा तो वहीं उनको भी इसका अतिरिक्त खर्च उठाना होगा।