मकर संक्रांति पर श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में करीब तीन लाख भक्तों ने दर्शन-पूजन किया। दोपहर की मध्याह्न भोग आरती में बाबा को खिचड़ी-अचार और शाम की शृंगार आरती में चूड़ा-मटर का भोग लगा। मंदिर प्रशासन की ओर से भोग भंडार में प्रसाद तैयार कराकर पुजारियों को उपलब्ध कराया गया।
बृहस्पतिवार को मंगला आरती के बाद सुबह चार बजे से लेकर रात शयन आरती तक भक्तों का रेला उमड़ा रहा। गंगा में स्नान कर भक्त जल लेकर मंदिर पहुंच रहे थे और गर्भगृह के बाहर झांकी दर्शन कर पाइप से जल छोड़ रहे थे। दोपहर के 1:39 बजे के शुभ मुहूर्त में ही एक लाख से ज्यादा भक्तों ने दर्शन कर लिए थे।
बाबा विश्वनाथ की विशेष मध्याह्न भोग आरती विधि विधान से संपन्न हुई। इस दौरान परंपरागत और सात्त्विक अन्न से बाबा का भोग अर्पित किया गया। बाबा विश्वनाथ को खिचड़ी-अचार के साथ ही चिवड़ा, मूंगफली की पट्टी, पापड़ का भोग लगाया गया। भोग अर्पण के बाद विधि-विधान से बाबा की आरती उतारी गई। वहीं, शाम को शृंगार आरती में बाबा विश्वनाथ को देसी घी में बना चूड़ा-मटर चढ़ाकर काशी की कामना की गई। श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना की।
निश्चित समय में काशीवासियों को हुए बाबा के स्पर्श दर्शन
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के सीईओ विश्वभूषण मिश्र ने कहा कि आम तौर पर स्पर्श दर्शन बंद था लेकिन केवल काशीवासियों को निश्चित समय में बाबा का स्पर्श दर्शन कराया गया। वहीं, आगे स्पर्श दर्शन की व्यवस्था का फैसला भीड़ को देखकर ही लिया जाएगा। मंदिर प्रशासन की ओर से सभी व्यवस्थाएं सुचारु रूप से सुनिश्चित की गईं।
बद्रीनारायण का हुआ विशेष शृंगार
मकर संक्रांति पर विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर में स्थित बद्रीनारायण का विशेष शृंगार किया गया। वहीं, विश्वनाथ मंदिर के बाहर गंगा द्वार और गेट संख्या चार के बाहर भक्तों की पूरे दिन भीड़ जुटी रही। श्रद्धालुओं को दर्शन-पूजन करने के लिए लाइनों में आधे घंटे से लेकर ड़ेढ़-दो घंटे तक इंतजार करना पड़ गया।